राकेश कुमार शर्मा/करनाल-:करनाल की जुंडला अनाज मंडी में धान की खरीद और उठान में हो रही देरी को लेकर किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने सरकार और मंडी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। मंडी का निरीक्षण करने पहुंचे चढूनी ने कहा कि किसानों को अपनी फसल बेचने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।निर्धारित मानक के अनुसार 17 प्रतिशत तक नमी होने पर भी धान की कीमत में कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं।वहीं,समय पर उठान नहीं होने के कारण मंडियों में फसल जमा हो रही है।चढूनी ने आरोप लगाया कि पर्याप्त ट्रकों की व्यवस्था नहीं होने और अपेक्षा के अनुरूप राइस मिल नहीं पहुंचने से उठान की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।उन्होंने सरकार से खरीद व्यवस्था को सुचारु बनाने और मंडियों में किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की।
बारिश से खराब हो रही धान की फसल,किसानों की बढ़ी चिंता
चढूनी ने कहा कि हाल में हुई बारिश के कारण मंडियों में खुले में रखी धान की फसल प्रभावित हुई है।एक तरफ खरीद और उठान में देरी हो रही है,वहीं दूसरी ओर बारिश से फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है।उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित विभागों को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए,जिससे किसानों की फसल सुरक्षित रहे और खरीद के बाद उसका उठान समय पर हो सके।
पोर्टल पर 25 क्विंटल की सीमा बढ़ाने की मांग
धान की निकासी के लिए पोर्टल पर एक बार में 25 क्विंटल की सीमा निर्धारित होने से भी किसानों को परेशानी हो रही है।चढूनी ने सरकार से इस सीमा को बढ़ाने की मांग की।उन्होंने कहा कि जिन किसानों की फसल निर्धारित मात्रा से अधिक है,उन्हें निकासी के लिए अतिरिक्त प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे अपनी समस्या लिखित रूप में मंडी सचिव के सामने रखें,ताकि उच्च अधिकारियों से अनुमति लेकर शेष धान की निकासी का समाधान किया जा सके।
17 प्रतिशत नमी पर कम दाम मिले तो लिखित शिकायत करें किसान
गुरनाम सिंह चढूनी ने किसानों से अपील की कि यदि धान में नमी निर्धारित 17 प्रतिशत के मानक के भीतर होने के बावजूद व्यापारी या मिलर कम कीमत पर खरीद करता है,तो इसकी शिकायत मंडी सचिव को लिखित रूप में दें।उन्होंने कहा कि किसानों को निर्धारित मानकों के अनुसार अपनी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए। चढूनी ने मंडी प्रशासन से सूचना बोर्ड लगाने की मांग भी की, ताकि किसानों को पता चल सके कि धान की खरीद में अनुचित कटौती होने पर शिकायत कहां दर्ज करानी है।
किसानों से एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने की अपील
चढूनी ने किसानों से कहा कि वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए संगठित होकर आवाज उठाएं। उन्होंने राजनीतिक दलों के पीछे चलने के बजाय किसान संगठनों को मजबूत करने पर जोर दिया। उनके अनुसार,किसानों की एकजुटता से ही उनकी मांगों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सकता है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने पर उठाए सवाल
दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के मुद्दे पर भी चढूनी ने सरकार को घेरा। उन्होंने बताया कि वह प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली गए थे, जहां बैरिकेडिंग के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया और करीब 10 घंटे बाद रिहा किया गया।चढूनी ने सवाल उठाया कि जब पहले जंतर-मंतर पर विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन होते रहे हैं, तो अब लोगों को वहां विरोध दर्ज कराने से क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने प्रदूषण संबंधी तर्कों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगहों के किराये पर भी जताई आपत्ति
चढूनी ने दावा किया कि दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जिन वैकल्पिक स्थानों का सुझाव दिया जा रहा है, उनमें कुछ का किराया करीब 50 हजार रुपये प्रतिदिन है। उन्होंने सवाल किया कि आम नागरिक और आंदोलनकारी इतनी बड़ी रकम खर्च करके प्रदर्शन कैसे कर सकते हैं।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों और आम लोगों को अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करने का अवसर नहीं दिया गया, तो गांवों में आने वाले भाजपा नेताओं का विरोध किया जाएगा। चढूनी ने सरकार से मांग की कि लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने के लिए उचित स्थान उपलब्ध कराया जाए।
मंडी सचिव बोले- 1.73 लाख क्विंटल धान पहुंचा, 40 प्रतिशत का उठान पूरा
वहीं, मार्केट कमेटी के सचिव नरेश मान ने बताया कि सोमवार शाम तक जुंडला अनाज मंडी में 1.73 लाख क्विंटल धान की आवक दर्ज की गई थी। उनके अनुसार, इसमें से करीब 40 प्रतिशत धान का उठान हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि उठान के मामले में जुंडला मंडी प्रदेश की मंडियों में दूसरे स्थान पर है।नरेश मान ने बताया कि मंडी में अब तक 13 राइस मिल पहुंच चुके हैं। मंगलवार या बुधवार तक पांच और राइस मिल आने की उम्मीद है। अतिरिक्त मिलों के पहुंचने के बाद धान के उठान में तेजी आने की संभावना है।
