शिमला -:हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा,अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में जापान के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के नेतृत्व में विभागीय प्रतिनिधिमंडल ने टोक्यो मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी का दौरा कर शैक्षणिक सहयोग,अनुसंधान, ज्ञान के आदान-प्रदान और विद्यार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर कार्यक्रमों की संभावनाओं पर चर्चा की।जापान के अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक भ्रमण पर गए हिमाचल के इंजीनियरिंग विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय में आयोजित सेमिनार में भाग लिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने जापान की उन्नत शिक्षा प्रणाली,अत्याधुनिक तकनीकों,अनुसंधान,नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
राजेश धर्माणी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जापान के साथ तकनीकी शिक्षा,अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएं तलाश रहा है।उन्होंने कहा कि दोनों देशों की विशेषज्ञता और क्षमताओं को एक साथ लाकर विद्यार्थियों एवं युवाओं के लिए वैश्विक स्तर के अवसर सृजित किए जा सकते हैं।उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर से विद्यार्थियों को नई तकनीकों और वैश्विक शैक्षणिक वातावरण को समझने का अवसर मिलता है।ऐसे कार्यक्रम युवाओं के ज्ञान एवं कौशल को मजबूत करने के साथ उन्हें भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।तकनीकी शिक्षा मंत्री ने होक्काइडो यूनिवर्सिटी, साप्पोरो में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज फॉर सस्टेनेबल फूड,हेल्थ एंड मैटेरियल्स’ (ICATS-FHM 2026) में मुख्यातिथि के रूप में भी भाग लिया। सम्मेलन में विभिन्न देशों के शिक्षाविदों,शोधकर्ताओं, संकाय सदस्यों,विद्यार्थियों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।सम्मेलन को संबोधित करते हुए धर्माणी ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच उन्नत प्रौद्योगिकी, सतत कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण, उन्नत सामग्री, अनुसंधान और कौशल विकास के क्षेत्र में व्यापक सहयोग की संभावनाएं हैं।उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक एवं पारिस्थितिक परिस्थितियों को देखते हुए ऐसी तकनीकों को बढ़ावा देना आवश्यक है, जो विकास के साथ पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी सुनिश्चित करें। प्रदेश की कृषि, बागवानी, जल संसाधनों और प्राकृतिक संपदा के बेहतर उपयोग के लिए जापान की तकनीकी विशेषज्ञता उपयोगी साबित हो सकती है।
धर्माणी ने कहा कि भारत के प्रतिभाशाली युवाओं और जापान की तकनीकी विशेषज्ञता एवं अनुसंधान क्षमता के बीच बेहतर समन्वय से रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इसके लिए विश्वविद्यालयों,शोध संस्थानों, उद्योगों, विद्यार्थियों और दोनों देशों की सरकारों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करना समय की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा,अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर,आधुनिक कौशल तथा अनुसंधान एवं नवाचार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है।जापान की यह शैक्षणिक एवं तकनीकी यात्रा प्रदेश के युवाओं को वैश्विक तकनीकी परिदृश्य से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।प्रधान सचिव तकनीकी शिक्षा डॉ.अभिषेक जैन ने कहा कि जापान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल हैएक्सपोजर विजिट के माध्यम से हिमाचल के विद्यार्थी नई पीढ़ी की तकनीकों और आधुनिक तकनीकी कार्यप्रणाली की नवीनतम जानकारी हासिल कर रहे हैं।
