शिमला/संजू-:शिमला के लोअर बाजार से तहबाजारियों को हटाए जाने के बाद अब रोजगार का संकट गहराता जा रहा है। पिछले चार महीनों से आजीविका प्रभावित होने से परेशान तहबाजारियों ने अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान कर दिया है। इसी सिलसिले में तहबाजारी यूनियन के सदस्य नगर निगम के उपमहापौर कार्यालय पहुंचे और अपनी समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखीं। हालांकि, अदालत के आदेशों का हवाला देते हुए मामले में कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। बैठक के दौरान तहबाजारियों ने निगम कर्मचारियों पर गोदामों से सामान उठाने के आरोप भी लगाए। वहीं, महापौर सुरेंद्र चौहान का कहना है कि तहबाजारियों के पुनर्वास के लिए नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं और प्रशासन नियमों के तहत ही काम करेगा।
लोअर बाजार में तहबाजारियों को हटाए जाने के बाद उनकी आजीविका का सवाल लगातार गंभीर होता जा रहा है। तहबाजारी यूनियन के अध्यक्ष पवन के मुताबिक, पिछले चार महीनों से कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा है। उनका आरोप है कि चुनाव के दौरान जिस सरकार का उन्होंने समर्थन किया, वही आज उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है। रोजगार बंद होने से तहबाजारी और उनके परिवार आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।यूनियन का कहना है कि बार-बार अपनी समस्याएं उठाने के बावजूद उन्हें अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं मिल पाया है।बैठक के दौरान तहबाजारियों ने नगर निगम के कर्मचारियों पर दुकानों और गोदामों में रखा सामान उठाने का आरोप लगाया।पवन का दावा है कि काम करने वाले युवाओं के सामान को भी रास्ते में छीना जा रहा है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक के हस्तक्षेप के बावजूद कुछ लोगों पर पांच हजार से दस हजार रुपये तक जुर्माना लगाया गया है। तहबाजारियों का कहना है कि प्रशासन को कार्रवाई करने के साथ उनकी आजीविका का विकल्प भी उपलब्ध करवाना चाहिए।
