शिमला,संजू-:हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों पर बढ़ते कचरे और प्रदूषण को लेकर राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने चिंता जताई है।उन्होंने कहा कि बाहरी लोगों के चिंता जताने से पहले स्थानीय लोगों को अपने प्रदेश की स्वच्छता के बारे में सोचना चाहिए।हिमाचल को अपना घर समझकर साफ-सुथरा रखना सभी की जिम्मेदारी है। राज्यपाल लोकभवन में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति सत प्रकाश बंसल द्वारा लिखित पुस्तक ‘अक्षर से आत्मबोध तक’ के लोकार्पण के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
राज्यपाल ने कहा कि कचरे से प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता प्रभावित होती है और पर्यटकों के बीच भी गलत संदेश जाता है।पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।इसके लिए सरकार के साथ-साथ आम जनता की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।पुस्तक के लोकार्पण पर राज्यपाल ने लेखक सत प्रकाश बंसल को बधाई देते हुए कहा कि भाषा राष्ट्रीय एकता का महत्वपूर्ण घटक है।नई शिक्षा नीति में त्रिभाषा सूत्र को मजबूती से लागू करने की आवश्यकता है।उन्होंने शिक्षण संस्थानों में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और स्थानीय भाषाओं की लिपियों के विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने पर कई स्थानीय भाषाओं के लुप्त होने का खतरा है।
नौतोड़ के मुद्दे पर राज्यपाल ने बताया कि वर्ष 1997 तक दो हजार रुपये से कम आय वाले लोगों को इसका लाभ देने का नियम था।इस संबंध में उन्होंने लोकभवन में उपायुक्त से जानकारी मांगी है और आने वाले दिनों में इस दिशा में काम किया जाएगा।वहीं,नौणी विश्वविद्यालय में कुलपति और रजिस्ट्रार के बीच विवाद पर राज्यपाल ने कहा कि बातचीत के जरिए मामले को सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने इसे सामान्य विवाद बताते हुए कहा कि कभी-कभी घरों में भी मतभेद हो जाते हैं।
राज्यपाल ने अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए सनातन परंपरा और राम मंदिर निर्माण में उनके योगदान को याद किया।उन्होंने लोगों से अपनी संस्कृति और परंपराओं को समझने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने की अपील की।पुस्तक के लेखक सत प्रकाश बंसल ने कहा कि युवा पीढ़ी को मातृभाषा का महत्व समझना चाहिए।उन्होंने भारतीय और स्थानीय भाषाओं के संरक्षण तथा विकास पर जोर देते हुए कहा कि भाषा के माध्यम से विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
