शिमला-:दृष्टिबाधित लोगों को शिक्षा,रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराने में कंप्यूटर टेक्नोलॉजी की महत्वपूर्ण भूमिका है।राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित दृष्टिबाधित कॉरपोरेट रणनीतिकार दिव्या शर्मा ने कहा कि तकनीक के माध्यम से दृष्टिबाधित व्यक्ति अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग कर सकते हैं और समाज में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।वह गुरुवार को विश्व श्वेत छड़ी दिवस (व्हाइट केन डे) के अवसर पर उमंग फाउंडेशन की ओर से आयोजित ऑनलाइन जागरूकता कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रही थीं।
दिव्या शर्मा को वर्ष 2023 में अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिव्यांगता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया था।वह मोटिवेशनल स्पीकर,मैराथन धावक,मार्शल आर्ट में ब्लू बेल्ट धारक, गिटारिस्ट,योग विशेषज्ञ और कवि भी हैं।
स्कूल से निकाला, फिर भी हासिल की उच्च शिक्षा
अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए दिव्या शर्मा ने बताया कि शिक्षा व्यवस्था और समाज में जागरूकता की कमी के कारण उन्हें दृष्टिबाधित होने की वजह से स्कूल से निकाल दिया गया था।हालांकि,उन्होंने कठिन परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय तथा पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से पत्राचार के माध्यम से उच्च शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।उन्होंने कहा कि कंप्यूटर टेक्नोलॉजी ने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दृष्टिबाधित लोगों को सामान्य कंप्यूटर और लैपटॉप पर टॉकिंग सॉफ्टवेयर की मदद से पढ़ाई करने, दस्तावेज तैयार करने और नौकरी से जुड़े कार्य करने में सहायता मिल सकती है। उन्होंने युवाओं को सहायक तकनीक अपनाने और डिजिटल कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
दया नहीं, समान अधिकार और अवसर जरूरी
दिव्या शर्मा ने सफेद छड़ी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह दृष्टिबाधित लोगों की सुरक्षित आवाजाही और आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक है।उन्होंने कहा कि दृष्टिबाधित व्यक्ति समाज के किसी भी अन्य व्यक्ति से कम नहीं हैं।उन्हें दया की नहीं,बल्कि समान अधिकारों,अवसरों और आधुनिक तकनीक की आवश्यकता है।
उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो.अजय श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय निर्वाचन आयोग की ब्रांड एंबेसडर, दृष्टिबाधित गायिका और संगीत की सहायक प्रोफेसर डॉ. मुस्कान नेगी ने की।उन्होंने दिव्यांगता के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई। हर वर्ष 15 अक्टूबर को मनाए जाने वाले व्हाइट केन डे का उद्देश्य दृष्टिबाधित लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रता के प्रति जागरूकता फैलाना है।
युवाओं ने पूछे तकनीक और शिक्षा से जुड़े सवाल
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से इसी वर्ष अच्छे अंकों में एमबीए उत्तीर्ण करने वाली चंबा की दृष्टिबाधित युवा रुखसार शेख ने कंप्यूटर टेक्नोलॉजी की शिक्षा प्राप्त करने के अवसरों के बारे में सवाल किया।विश्वविद्यालय से पोस्टडॉक्टरेट कर रहे दिव्यांग शोधार्थी डॉ.मुकेश कुमार ने कहा कि समाज में अपनी जगह बनाने के लिए शिक्षा सबसे प्रभावी हथियार है।
बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहांस) से पीएचडी कर रहीं शिमला की विपाशा श्रीवास्तव ने अपने शोध के आधार पर दृष्टिबाधित बच्चों और युवाओं के मस्तिष्क की कार्यप्रणाली पर जानकारी दी।दृष्टिबाधित सहायक प्रोफेसर प्रतिभा ठाकुर ने भी सफेद छड़ी और कंप्यूटर तकनीक की उपयोगिता बताई।कार्यक्रम का संचालन समाजशास्त्र में पीएचडी कर रहे दृष्टिबाधित शोधार्थी अभिषेक भागड़ा ने किया। तेलंगाना के कौस्तुभ,ठियोग के मदन शर्मा और सुंदरनगर के विनीत सहित कई युवाओं ने सवाल पूछे,जिनका दिव्या शर्मा ने जवाब दिया।
