चंबा,मंजूर पठान-:हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी जिलों में इन दिनों मटर की फसल किसानों के लिए खुशियों और बेहतर आमदनी का जरिया बनी हुई है।पहाड़ी क्षेत्रों में मटर की फसल का तुड़ान कार्य लगातार जारी है और खेतों से निकलने के बाद मटर की खेप बाहरी राज्यों के लिए भेजी जा रही है।फसल की अच्छी पैदावार और शुरुआती दौर में मिले बेहतर दामों के चलते किसानों के चेहरे पर खुशी देखने को मिल रही है।
पहाड़ी इलाकों में किसानों ने मटर की फसल को तैयार करने के लिए कई महीनों तक कड़ी मेहनत की है।ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम की परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं।कभी बारिश, कभी ठंड और कभी तापमान में बदलाव के बीच किसानों को फसल की देखभाल करनी पड़ती है।इसके बावजूद इस बार कई इलाकों में मटर की फसल बेहतर होने से किसानों को उम्मीद है कि उन्हें अपनी मेहनत का अच्छा आर्थिक लाभ मिलेगा।मटर के सीजन की शुरुआत में किसानों को करीब 170 से 180 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिला। शुरुआती दौर में बाजार में मटर की आवक कम होने के कारण किसानों को बेहतर कीमत मिली, जिससे किसानों में खासा उत्साह देखने को मिला।जैसे-जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में मटर की फसल तैयार होती गई और तुड़ान का कार्य तेज हुआ,वैसे-वैसे मंडियों और बाजारों में इसकी आवक भी बढ़ने लगी।वर्तमान में कई जगहों पर किसानों को मटर का भाव करीब 80 से 90 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है।हालांकि शुरुआती दौर की तुलना में मटर के दाम में कमी आई है,लेकिन किसानों का कहना है कि मौजूदा भाव भी कई परिस्थितियों में संतोषजनक हैं।खासकर उन किसानों के लिए जिनकी फसल अच्छी हुई है और जिन्हें खेत से ही मटर की खरीद के लिए व्यापारी और बाहरी विक्रेता पहुंच रहे हैं।
खेतों से सीधे हो रही मटर की खरीद
पहाड़ी क्षेत्रों में मटर की फसल का तुड़ान शुरू होने के साथ ही बाहरी राज्यों से आने वाले व्यापारी और विक्रेता भी सक्रिय हो गए हैं।कई जगहों पर किसान अपनी फसल को खेतों से ही बेच रहे हैं।इससे किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त परिवहन व्यवस्था करने की जरूरत कम पड़ रही है।
स्थानीय किसानों के मुताबिक,बाहरी खरीदार खेतों और गांवों तक पहुंचकर मटर की खरीद कर रहे हैं। इससे किसानों को फसल बेचने में सुविधा मिल रही है और उन्हें अपनी उपज का भुगतान भी अपेक्षाकृत जल्दी प्राप्त हो जाता है।किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मटर के दाम इसी तरह अच्छे बने रहे तो इस सीजन में उन्हें अच्छी आमदनी हो सकती है।
मेहनत के बाद मिल रहा फसल का अच्छा दाम
पहाड़ी क्षेत्रों में खेती करना आसान काम नहीं है। खेतों का छोटा आकार,पहाड़ी ढलान,सीमित सिंचाई सुविधाएं और परिवहन की चुनौती किसानों के सामने हमेशा बनी रहती है। ऐसे में किसान अपनी मेहनत और पारंपरिक अनुभव के सहारे फसल तैयार करते हैं।मटर की फसल के लिए भी किसानों को लंबे समय तक खेतों में मेहनत करनी पड़ती है। बीज की बुआई से लेकर फसल की देखभाल और फिर तुड़ान तक किसान और उनके परिवार के सदस्य लगातार खेतों में जुटे रहते हैं। ऐसे में जब तैयार फसल का अच्छा भाव मिलता है तो किसानों को अपनी मेहनत का प्रतिफल मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है।
अच्छी फसल ने बढ़ाई किसानों की आर्थिक उम्मीद
किसानों का कहना है कि मटर की अच्छी पैदावार और बेहतर बाजार भाव से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले पहाड़ी क्षेत्रों में नकदी फसलें ग्रामीण परिवारों की आय का महत्वपूर्ण साधन हैं। मटर की फसल भी किसानों को सीजनल आमदनी उपलब्ध करवाती है।
कई किसान मटर की खेती को इसलिए भी प्राथमिकता देते हैं क्योंकि इसकी मांग बाहरी बाजारों में बनी रहती है। स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाला मटर आसपास के बाजारों के साथ-साथ प्रदेश के बाहर भी भेजा जाता है। यदि बाजार में मांग बनी रहती है और किसानों को उचित मूल्य मिलता है तो यह फसल उनके लिए काफी लाभदायक साबित हो सकती है।
किसानों को आगे भी अच्छे भाव की उम्मीद
स्थानीय किसानों का कहना है कि अभी मटर की तुड़ाई का कार्य लगातार जारी है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे बाजार में मटर की आवक बढ़ेगी, कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है। इसके बावजूद किसानों को उम्मीद है कि उनकी मेहनत को देखते हुए उन्हें उचित बाजार भाव मिलता रहेगा।किसानों का कहना है कि शुरुआती समय में 170 से 180 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिलना उनके लिए उत्साहजनक रहा। वर्तमान में 80 से 90 रुपये प्रति किलो तक भाव मिल रहा है। यदि बाजार में मांग अच्छी रही और फसल का भाव स्थिर बना रहा तो इस सीजन में मटर किसानों के लिए अच्छी आमदनी का जरिया बन सकता है।
कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में इन दिनों खेतों में मटर की तुड़ाई का दौर जारी है। खेतों में तैयार मटर की फसल देखकर जहां किसानों को अच्छी पैदावार की खुशी है, वहीं बाजार में मिल रहे अपेक्षाकृत बेहतर दामों ने उनकी आर्थिक उम्मीदों को भी मजबूत किया है। अब किसानों की नजर आने वाले दिनों के बाजार भाव पर टिकी हुई है, ताकि उन्हें अपनी मेहनत और लागत के मुकाबले बेहतर मुनाफा मिल सके
