शिमला-:हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।सरकार ने’रेजिडेंट डॉक्टर्स पॉलिसी-2025’में संशोधन किया है।इस बदलाव से पोस्टग्रेजुएट (PG) की पढ़ाई पूरी कर चुके योग्य डॉक्टरों के लिए राज्य के मेडिकल कॉलेजों में नियुक्ति पाने का रास्ता आसान होगा।विशेष रूप से पीजीआई चंडीगढ़ और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS),नई दिल्ली से अपनी स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा पूरी करने वाले अभ्यर्थियों को इसका लाभ मिलेगा।
बिना लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के होगी नियुक्ति
नई व्यवस्था के तहत निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करने वाले डॉक्टरों को राज्य के मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर स्पेशलिस्ट के रिक्त पदों पर बिना लिखित परीक्षा या इंटरव्यू के नियुक्त किया जा सकेगा। इन पदों पर चयन के लिए उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और मेरिट को प्रमुख आधार बनाया जाएगा।
चयन प्रक्रिया में अभ्यर्थियों के एमबीबीएस और पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रम की परीक्षाओं में प्राप्त अंकों को ध्यान में रखा जाएगा। इससे योग्य उम्मीदवारों का मूल्यांकन उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर किया जा सकेगा। हालांकि, नियुक्ति के लिए संबंधित पदों की निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना आवश्यक होगा।
33.33 प्रतिशत कोटे के तहत मिलेगी नियुक्ति
चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, इन पदों पर नियुक्तियां सीधे उम्मीदवारों के लिए निर्धारित 33.33 प्रतिशत कोटे के अंतर्गत की जाएंगी।नीति में किया गया यह संशोधन राज्य के मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने और रिक्त पदों को भरने की दिशा में अहम माना जा रहा है।सरकार का उद्देश्य प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से प्रशिक्षित योग्य डॉक्टरों को हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ना है,ताकि मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।स्वास्थ्य विभाग के एक प्रवक्ता के अनुसार, इस बदलाव से विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को मजबूती मिलेगी। साथ ही,मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों की कमी दूर करने और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
