मंडी, धर्मवीर ( TSN)-आज जब लद्याख हिमालय के सरंक्षण और लोकतंत्र बहाली की लड़ाई लड़ रहा है तो केंद्र सरकार ने यहां के विकास कार्याें पर लगाम लगा दी है। जिससे केंद्र और लद्याख के बीच वार ऑफ नर्व्स की लड़ाई शुरू हो गई है। जब तक सरकार किए हुए सरंक्षण के वादों पूरा नही करती है तो तब तक लद्याख की जनता झुकने के लिए तैयार नहीं है। यह बात मंडी में मीडिया से रूबरू होते हुए पर्यावरणविद सोमन वांगचुक ने कही।
पहले संरक्षण के वादों को पूरा करे केंद्र सरकार, उसके बाद ही झुकेगी लद्दाख की जनता
बतां दे कि सोमन वांगचुक की लेह से दिल्ली पदयात्रा शनिवार को छोटी काशी मंडी पहुंची। इस पदयात्रा के दौरान वे कुछ समय के लिए बिंद्रावणी स्थित हिमाचल दर्शन फोटो गैलरी में भी रूके। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कें्रद शासित प्रदेश बनने के बाद केंद्र सरकार ने लद्याख के विकास को रोक कर रख दिया है। कागजों में लद्याख के लिए करोड़ों रुपये का बजट तो दिखा दिया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद यह बजट वापिस भी चला जाता है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि धरातल पर लद्याख में सड़कें बनाने के अलावा और कोई काम नहीं हुआ है। आज यहां का युवा बेरोजगार घूम रहा है और जनता से लोकतंत्र का हक छीना जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से आव्हान करते हुए इस मसले को जल्द सुलझाने की मांग उठाई ताकि यहां का युवा गलत राह पर चलने से बच सके।
वहीं सोनम वांगचुक ने कहा कि इस पदयात्रा के माध्यम से वे कोई राजनीति नहीं कर रहे हैं और न ही राजनीति में जाने की उनकी कोई रुचि है। कई राजनीतिक पार्टियों के द्वारा उन पर कई तरह के दबाव भी बनाने जाते हैं। लेकिन वे किसी पार्टी की नहीं पूरे लद्दाख की जनता की आवाज बनकर कार्य करना चाहते है। हिमालय के सरंक्षण और लोकतंत्र बहाली के लिए शुरू की गई इस लड़ाई में वे एक दिन जरूर कामयाब होंगे।
शहरों की अपेक्षा पहाड़ों में ज्यादा तेजी से हो रहा जलवायु परिवर्तन
सोनम वांगचुक ने कहा कि संसार आज विकास से विनाश की ओर बढ़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते हो रहे जलवायु परिवर्तन के कारण आज संसार प्रलय की ओर अग्रसर है। क्लाईमेट क्लॉक के माध्यम से वे यह बात भी लोगों के समझा रहे हैं। अब मात्र साढ़े 4 वर्ष का समय रह गया है और यदि यह समय भी निकल गया तो आने वाले समय में चाहकर भी इस प्रलय को रोका नहीं जा सकता है। इसके लिए आज ही लोगों व सरकारों का जागने की आवश्यकता है।वहीं उन्होंने कहा कि विकास की इस अंधाधुध दौड़ के बीच संतुष्टि की लकीर होना जरूरी है। और इस लकीर की गरिमा पहाड़ों में आने वाले पर्यटकों को भी रखनी होगी। बड़े शहरों के लोग आज पहाडों में पर्यटक बनकर आ रहे हैं, जिस कारण शहरों की अपेक्षा पहाड़ों में ज्यादा तेजी से जलवायु परिर्वन हो रहा है। पहाड़ों में अब विकास व पर्यटन के नाम पर कुछ भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बतां दे कि पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने 1 सितंबर से 2 अक्टूबर तक लेह से दिल्ली के लिए पैदल पदयात्रा शुरू की है। इस पद यात्रा का उद्देश्य हिमालय का संरक्षण और लद्दाख में लोकतंत्र बहाली करना है। 21 वें दिन शनिवार को यह पदयात्रा छोटीकाशी मंडी पहुंची। इस पदयात्रा में 130 के करीब और यात्री भी सोनम वांगचुक के साथ चले हुए हैं। मंडी पहुंचकर वे कुछ देर के लिए फोरलेन पर बिंद्रावणी में स्थित हिमाचल दर्शन फोटो गैलरी में भी रुके और उन्होंने फोटो गैलरी का भी भ्रमण किया। इस दौरान कई महिला मंडलों, संस्थाओं के पदाधिकारियों व मंडी शहर के पर्यावरण प्रेमियों ने भी उनके साथ मुलाकात की।
