शिमला-:भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से हिमाचल प्रदेश के लंबित वित्तीय अधिकारों और बकाया राशि की वसूली को लेकर राज्य सरकार ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं।मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर से फोन पर बातचीत कर इस मामले में केंद्र सरकार से सक्रिय सहयोग का आग्रह किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश लंबे समय से अपने वैधानिक अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहा है और राज्य सरकार उन्हें सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है।उन्होंने केंद्रीय मंत्री को बताया कि किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना पर हिमाचल तभी आगे बढ़ेगा,जब हरियाणा सरकार बीबीएमबी से जुड़े बकाया भुगतान के संबंध में स्पष्ट सहमति देगी और इस आशय का शपथ-पत्र सर्वोच्च न्यायालय में दायर करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के हितों की अनदेखी करते हुए किसी नई परियोजना में सहयोग की अपेक्षा उचित नहीं है।उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार आग्रह के बावजूद पंजाब और हरियाणा ने हिमाचल प्रदेश को उसके वैधानिक अधिकारों से वंचित रखा है।केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि वह इस विषय पर पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों से चर्चा करेंगे तथा समाधान निकालने के लिए आवश्यक पहल करेंगे।मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने लगभग 15 वर्ष पहले अपने आदेश में हिमाचल प्रदेश को बीबीएमबी की परियोजनाओं और उनसे मिलने वाले लाभों में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिकार दिया था। इसके बावजूद राज्य पिछले एक दशक से अधिक समय से अपने हिस्से की 13,066 मिलियन यूनिट बिजली और उससे जुड़े वित्तीय लाभों से वंचित है।उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार अब बीबीएमबी से अपने हिस्से के करीब 4,200 करोड़ रुपये के बकाये की वसूली के लिए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राशि प्रदेश के लोगों का वैधानिक अधिकार है और सरकार इसे हर हाल में प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
