धर्मशाला,राहुल-:केरल के वायनाड में हुई भीषण प्राकृतिक आपदा ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के फतेहपुर क्षेत्र के टकोली गिरथा गांव में गहरा शोक छोड़ दिया है।हादसे में लापता हुए विक्रम राणा का पार्थिव शरीर सात दिनों के सघन खोज अभियान के बाद बरामद किया गया।सोमवार को जब उनका शव पैतृक गांव पहुंचा तो पूरे क्षेत्र में मातम का माहौल छा गया। परिजनों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। उनके बेटे ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की।
वायनाड त्रासदी के बाद विक्रम राणा की तलाश के लिए कई दिनों तक लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया गया।जानकारी के अनुसार, करीब एक हजार स्वयंसेवकों,बचावकर्मियों और डॉग स्क्वायड की टीम ने अभियान में हिस्सा लिया,जिसके बाद उनका पार्थिव शरीर बरामद किया जा सका। शव गांव पहुंचते ही बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। विक्रम राणा अपने पीछे पत्नी,एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं।मृतक के बड़े भाई कुलवंत राणा ने बताया कि खोज अभियान के दौरान केरल सरकार और स्थानीय प्रशासन ने पूरा सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के मंत्रियों ने भी परिवार से लगातार संपर्क बनाए रखा।साथ ही सांसद प्रियंका गांधी ने भी हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया, जिसके लिए परिवार ने उनका आभार व्यक्त किया।अंतिम संस्कार में पूर्व वन मंत्री राकेश पठानिया भी शामिल हुए। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि विक्रम राणा की मृत्यु अत्यंत दुखद है और इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले लोगों के लिए विशेष राहत और सम्मान की व्यवस्था होनी चाहिए।उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को अधिक से अधिक सहायता प्रदान करने की दिशा में गंभीरता से विचार किया जाए।
वहीं, फतेहपुर के एसडीएम रमन शर्मा ने बताया कि उन्होंने हाल ही में कार्यभार संभाला है और मामले की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है तथा सरकार की ओर से मिलने वाली हर संभव सहायता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रस्ताव और औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।
