55 साल का इंतजार खत्म कब? पौंग बांध विस्थापितों ने उठाई आरक्षित जमीन वापस दिलाने की मांग

नूरपुर,संजीव-:देश के विकास की कीमत अगर किसी ने सबसे ज्यादा चुकाई,तो उनमें पौंग बांध विस्थापित परिवार भी शामिल हैं। बिजली उत्पादन हुआ, राजस्थान के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचा और विकास की तस्वीर बदली, लेकिन जिन परिवारों ने अपनी जमीन, घर और गांव तक छोड़ दिए, उनका संघर्ष आज भी खत्म नहीं हुआ है। विस्थापितों का आरोप है कि 55 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें उनके अधिकार की जमीन नहीं मिल पाई है। फतेहपुर की उपतहसील राजा का तालाब में आयोजित प्रदेश पौंग बांध विस्थापित समिति की बैठक में विस्थापितों ने एक बार फिर सरकार से आरक्षित भूमि पर अपना हक दिलाने और कथित कब्जों को हटाने की मांग उठाई।

राजा का तालाब में हुई प्रदेश पौंग बांध विस्थापित समिति की बैठक में बड़ी संख्या में विस्थापित परिवारों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा राजस्थान के श्रीगंगानगर में पौंग बांध विस्थापितों के लिए आरक्षित भूमि का रहा। समिति का दावा है कि करीब 2 लाख 25 हजार एकड़ भूमि विस्थापितों के लिए आरक्षित की गई थी, लेकिन इसमें से 1188 मुरब्बों पर कथित तौर पर भू-माफिया ने कब्जा कर रखा है। विस्थापितों ने सवाल उठाया कि जब भूमि उनके पुनर्वास के लिए निर्धारित है, तो फिर दूसरे लोगों का उस पर कब्जा कैसे हो गया।
वक्ताओं ने कहा कि पांच दशक से ज्यादा समय गुजर चुका है, लेकिन हर सरकार की ओर से आश्वासन मिलने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। उनका आरोप है कि सरकारी स्तर पर फाइलें चलती रहीं, समितियां बनती रहीं और आश्वासन मिलते रहे, लेकिन जमीन का वास्तविक अधिकार आज भी हजारों परिवारों को नहीं मिला।

“हम किसी की जमीन नहीं मांग रहे हैं, हम अपना हक मांग रहे हैं। सरकार स्पष्ट करे कि हमारे लिए आरक्षित जमीन कहां है और उस पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। अब विस्थापित परिवार सिर्फ आश्वासन के भरोसे नहीं बैठेंगे।”

बैठक में केंद्र और राजस्थान सरकार के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए। विस्थापितों ने कहा कि बांध निर्माण के समय देशहित को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने अपनी उपजाऊ जमीन, घर और पुश्तैनी गांव छोड़ दिए थे। कई परिवारों के सामने नई जगह पर बसने और आजीविका शुरू करने की चुनौती थी। उनका कहना है कि समय बीतने के साथ कई बुजुर्ग अपने अधिकार की लड़ाई लड़ते-लड़ते दुनिया से चले गए, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।विस्थापितों ने आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान उनके मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाता है और समाधान के वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद उनकी समस्याएं फिर पीछे छूट जाती हैं। समिति ने स्पष्ट किया कि अब यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अधिकार और सम्मान के लिए है।

बैठक में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई। समिति का कहना है कि विस्थापितों को ऐसी जमीन नहीं चाहिए, जहां उनके लिए दोबारा नई परेशानियां खड़ी हों। उनकी मांग है कि श्रीगंगानगर में उनके नाम पर आरक्षित भूमि का रिकॉर्ड स्पष्ट किया जाए और पात्र विस्थापितों को उनका अधिकार दिलाया जाए।विस्थापितों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उनका कहना है कि 55 साल का इंतजार अब काफी लंबा हो चुका है और आने वाली पीढ़ी को भी इस संघर्ष में झोंकना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मनोहर लाल विश्वकर्मा, पौंग बांध विस्थापित:

“हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति या सरकार से नहीं, अन्याय के खिलाफ है। हमने देश के लिए अपना सब कुछ छोड़ा। अब सरकार हमारी आरक्षित जमीन हमें दिलाए। जब तक हर पात्र विस्थापित को उसका अधिकार नहीं मिलता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”

पौंग बांध ने देश को बिजली दी, राजस्थान के खेतों को पानी दिया और विकास की नई कहानी लिखी। लेकिन इस विकास की कीमत चुकाने वाले हजारों परिवार आज भी अपने हक की जमीन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। राजा का तालाब की बैठक से उठी आवाज अब एक बार फिर सरकार के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर रही है—क्या 55 साल बाद पौंग बांध विस्थापितों को उनका अधिकार मिलेगा, या उनकी अगली पीढ़ी भी न्याय के इंतजार में संघर्ष करती रहेगी?

Ekta TSN

rahulkash03@gmail.com http://www.thesummernews.in

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

प्रधानमंत्री के पोस्टर से छेड़छाड़ पर भाजपा नाराज, दोषियों पर कार्रवाई की मांग

हमीरपुर,अरविंद- हमीरपुर शहर से सुजानपुर की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर अणु के समीप प्रधानमंत्री से संबंधित एक सरकारी योजना के प्रचार के लिए लगाए गए पोस्टर के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि अज्ञात शरारती तत्वों ने पोस्टर पर लगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की...

बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम बना चिंता का कारण, मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर

शिमला,संजू-:हिमाचल प्रदेश में बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।बदलती जीवनशैली, मोबाइल और इंटरनेट का बढ़ता इस्तेमाल तथा युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को गंभीर बना रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में अत्यधिक स्क्रीन टाइम और अनुचित डिजिटल सामग्री का...

जगत सिंह नेगी ने सोलन सेब मंडी का किया औचक निरीक्षण, आढ़तियों पर कार्रवाई के दिए निर्देश

सोलन,भूपेंद्र-:बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने शनिवार को सोलन स्थित फल एवं सब्जी मंडी का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने मंडी में सेब कारोबार, बागवानों को भुगतान और लाइसेंसी आढ़तियों से संबंधित व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बागवानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।जगत सिंह नेगी ने...

शिमला जिला परिषद चुनाव पर सियासत तेज, जयराम ठाकुर ने दी डिसी DC ऑफिस घेराव की चेतावनी

शिमला,संजू-:शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर हिमाचल प्रदेश में सियासी घमासान तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भाजपा के पास जिला परिषद में बहुमत होने का दावा करते हुए प्रशासन पर चुनाव प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचने का आरोप लगाया है। शिमला में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के...

55 साल का इंतजार खत्म कब? पौंग बांध विस्थापितों ने उठाई आरक्षित जमीन वापस दिलाने की मांग

नूरपुर,संजीव-:देश के विकास की कीमत अगर किसी ने सबसे ज्यादा चुकाई,तो उनमें पौंग बांध विस्थापित परिवार भी शामिल हैं। बिजली उत्पादन हुआ, राजस्थान के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचा और विकास की तस्वीर बदली, लेकिन जिन परिवारों ने अपनी जमीन, घर और गांव तक छोड़ दिए, उनका संघर्ष आज भी खत्म नहीं हुआ है।...

NE

News Elementor

We bring you fast, clear, and credible news that cuts through the noise. From breaking headlines to stories that matter, count on us for smart, engaging coverage every day.

Stay informed. Stay curious. Stay with The Summer News.

Popular Categories

Must Read

Copyright © 2025 Summer News Network Pvt. Ltd.