पंचकूला-:हरियाणा में पिछले दो दिनों से जारी बिजली कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त हो गई है।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ हुई बैठक के बाद कर्मचारी यूनियनों ने हड़ताल वापस लेने की घोषणा की।कर्मचारियों ने तत्काल काम पर लौटकर बिजली आपूर्ति बहाल करने का निर्णय लिया है।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार बिजली क्षेत्र में निजीकरण के पक्ष में नहीं है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने और कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।समानांतर बिजली लाइसेंस के मुद्दे पर सरकार कर्मचारियों के साथ खड़ी है और इस मामले में कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
समानांतर बिजली लाइसेंस के आदेश की होगी समीक्षा
मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) के समानांतर बिजली लाइसेंस संबंधी आदेश को लेकर सरकार विद्युत अधिनियम,2003 की धारा 108 के तहत आवश्यक कार्रवाई करेगी।इसके अलावा,अधिनियम की धारा 94 के तहत आयोग के आदेश की समीक्षा के लिए भी नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।उन्होंने कहा कि एचईआरसी एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है,जो अपने अधिकार क्षेत्र में निर्णय लेती है।हालांकि, आयोग के आदेश के बाद पैदा हुई स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार कानूनी और वैधानिक विकल्पों के माध्यम से अपना पक्ष रखेगी।
मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री के साथ सकारात्मक बातचीत
शुक्रवार को पंचकूला में बिजली कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में समानांतर बिजली लाइसेंस,निजीकरण के विरोध और कर्मचारियों की अन्य मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में ऊर्जा मंत्री अनिल विज सहित बिजली विभाग और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा मंत्री पिछले कई दिनों से कर्मचारी संगठनों के संपर्क में थे,ताकि बातचीत के जरिए समस्या का समाधान निकाला जा सके और आम जनता को बिजली संकट का सामना न करना पड़े।उन्होंने बताया कि एचईआरसी के आदेश से पहले ही विधानसभा में सरकार अपना रुख स्पष्ट कर चुकी थी कि वह प्रदेश में समानांतर बिजली लाइसेंस व्यवस्था के पक्ष में नहीं है।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी दोहराया सरकार का रुख
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि राज्य सरकार ने निजी कंपनी को समानांतर बिजली लाइसेंस देने के एचईआरसी के फैसले का शुरुआत से ही विरोध किया है।उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने इस संबंध में किसी निजी कंपनी से आवेदन आमंत्रित नहीं किए थे,हालांकि विद्युत अधिनियम के प्रावधानों के तहत संबंधित कंपनी आयोग के समक्ष आवेदन कर सकती है।उन्होंने बताया कि सरकार इस निर्णय के खिलाफ कानूनी विकल्प अपनाने के पक्ष में है।बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि विद्युत अधिनियम की धारा 108 के तहत आयोग को आवश्यक निर्देश जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।अधिकारियों को इस संबंध में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार का जताया आभार
हरियाणा ज्वाइंट एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों ने कहा कि बिजली कर्मचारी समानांतर बिजली लाइसेंस और निजीकरण के विरोध में पिछले दो दिनों से हड़ताल पर थे।बैठक के दौरान मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री ने कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से सुना और इस मुद्दे पर सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।सरकार के रुख और बातचीत के बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया। यूनियन प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री का आभार जताते हुए कर्मचारियों से तत्काल काम पर लौटने और बिजली आपूर्ति बहाल करने की अपील की।
3 नवंबर को फिर होगी बैठक
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारियों की अन्य मांगों पर भी बातचीत जारी रहेगी।इस संबंध में अगली बैठक 3 नवंबर को निर्धारित की गई है। सरकार ने भरोसा दिलाया कि बिजली व्यवस्था में जनहित की रक्षा करने,कर्मचारियों के हित सुरक्षित रखने और उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
