मंडी, धर्मवीर ( TSN)- हिंदू संगठनों द्वारा मंडी शहर के जेलरोड़ स्थित मस्जिद को तोड़ने की मांग को लेकर किए जा रहे विरोध प्रदर्शन के बीच नगर निगम ने अहम फैसला सुनाया है। इस फैसले में निगम ने बीना अनुमति के बनाए गए सारे ढांचे तो तोड़ते हुए इसे इसके पुराने स्वरूप में बहाल करने का आदेश दिया है। यदि मस्जिद कमेटी 30 दिनों के भीतर इस ढांचे को नहीं तोड़ती है तो फिर नगर निगम इसे तोड़ने का काम करेगी लेकिन इसे तोड़ने के लिए जो भी खर्च आएगा उसकी भरपाई मस्जिद कमेटी द्वारा ही की जाएगी।
नगर निगम आयुक्त ने मामले पर सुनवाई के बाद सुनाया फैसला
नगर निगम मंडी के कमिश्नर एच.एस. राणा ने आज इस मामले पर सुनवाई के बाद फैसला सुनाने के उपरांत मीडिया को दिए अपने बयान में बताया कि अक्तूबर 2023 में मस्जिद के नए भवन का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। निगम के पास इसके नक्शा के न होने की शिकायत पहुंची थी जिसके बाद इसपर कार्रवाई शुरू हुई थी। शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण का नक्शा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमों के तहत अप्रूव करवाना पड़ता है जिसके बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है। लेकिन मस्जिद कमेटी ने ऐसा नहीं किया और बार-बार नोटिस मिलने के बाद भी निर्माण कार्य को जारी रखा और तीन मंजिला ढांचे को खड़ा कर दिया। मामले की तह तक जाने के लिए नगर निगम द्वारा 27 जुलाई से इसपर सुनवाई शुरू की गई। आज इस मामले की छठी सुनवाई के दौरान जब मस्जिद कमेटी की दलीलें उचित नहीं पाई गई तो फिर बीना अनुमति के बने ढांचे तो 30 दिनों के भीतर तोड़ने का आदेश जारी किया गया है। आदेशों के तहत मस्जिद को अक्तूबर 2023 से पहले वाली स्थिति में लाना होगा।
बता दें कि अभी तक मस्जिद के सिर्फ उसी हिस्से को तोड़ा जा रहा था जिस हिस्से का निर्माण लोक निर्माण विभाग की जमीन पर किया गया था। लेकिन अब नए आदेशों के तहत मस्जिद के सारे हिस्से को ही तोड़ना पड़ेगा क्योंकि सारा निर्माण बीना अनुमति के हुआ है। लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि जो आदेश नगर निगम की तरफ से जारी किए गए हैं उनमें 30 दिनों के भीतर हायर अथॉरिटी के पास अपील करने का प्रावधान भी होता है। यदि कमिश्नर के आदेशों से मस्जिद कमेटी संतुष्ट नहीं होगी तो फिर आगे इसकी अपील की जा सकती है।
