अंबाला-:सफाई, सीवर एवं अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों के प्रस्तावित प्रदर्शन में पहुंचकर वरिष्ठ नेत्री चित्रा सरवारा ने आंदोलनरत कर्मचारियों की समस्याएं सुनीं और उनकी मांगों का समर्थन किया।उन्होंने सरकार से अपील की कि कर्मचारियों के साथ सख्ती करने के बजाय बातचीत और संवाद के माध्यम से उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए।
चित्रा सरवारा ने कहा कि कोरोना महामारी के कठिन दौर में जब लोग घरों से निकलने से भी डर रहे थे,उस समय सफाई कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर शहरों की सफाई व्यवस्था को बनाए रखने में जुटे रहे।सरकार और समाज ने उन्हें कोरोना योद्धा तथा स्वच्छता के अग्रिम प्रहरी के रूप में सम्मानित किया,लेकिन आज वही कर्मचारी अपने अधिकारों और रोजगार की सुरक्षा के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं। यह स्थिति सरकार से गंभीर सवाल पूछती है।उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी किसी भी शहर की व्यवस्था का मामूली हिस्सा नहीं, बल्कि स्वच्छता व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके बिना स्वच्छ शहर और स्वस्थ समाज की कल्पना संभव नहीं है।इसलिए सरकार को उनके आंदोलन को केवल हड़ताल या कानून-व्यवस्था के नजरिए से नहीं देखना चाहिए, बल्कि उन परिस्थितियों को समझना चाहिए जिनके कारण कर्मचारी सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हुए हैं।
24-25 मांगों पर सरकार गंभीरता से करे विचार
चित्रा सरवारा ने कहा कि कर्मचारियों की ओर से लंबे समय से करीब 24-25 मांगें सरकार के समक्ष रखी जा चुकी हैं।कर्मचारियों का कहना है कि कुछ मांगों को स्वीकार किए जाने के बावजूद उनकी मुख्य समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।उन्होंने नियमितीकरण,हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) से जुड़ी समस्याओं, पूर्व में किए गए समझौतों को लागू करने, सेवा सुरक्षा,उचित वेतन,सामाजिक सुरक्षा तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मांग पर समयबद्ध निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को बार-बार आंदोलन का रास्ता न अपनाना पड़े।
‘स्वच्छ भारत’ का असली चेहरा सफाई कर्मचारी
चित्रा सरवारा ने कहा कि ‘स्वच्छ भारत’ का अभियान केवल झाड़ू लेकर फोटो खिंचवाने और सोशल मीडिया पर रील बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। जब प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री, मंत्री और जनप्रतिनिधि स्वच्छता अभियानों में झाड़ू हाथ में लेकर तस्वीरें खिंचवाते हैं, तो उन्हें उन सफाई कर्मचारियों को भी याद रखना चाहिए जो हर दिन गंदगी, कूड़े, सीवर और संक्रमण के बीच काम करते हैं।उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत तभी सार्थक होगा, जब स्वच्छता का काम करने वाले कर्मचारियों का जीवन भी सुरक्षित, सम्मानजनक और अधिकार-संपन्न होगा।
सीवर कर्मचारियों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता बने
चित्रा सरवारा ने कहा कि सीवर और सफाई कार्य में कर्मचारियों को जहरीली गैस,संक्रमण और असुरक्षित परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। सरकार को उन्हें आधुनिक सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य सुविधाएं,जीवन एवं दुर्घटना बीमा तथा सुरक्षित कार्य परिस्थितियां उपलब्ध करवानी चाहिए।उन्होंने कहा कि किसी कर्मचारी की दुर्घटना में मृत्यु के बाद मुआवजा देना ही पर्याप्त नहीं है। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि कर्मचारी काम करते समय सुरक्षित रहें और उनके परिवार का भविष्य भी सुरक्षित हो।
समरसता पखवाड़े पर सरकार से पूछा सवाल
चित्रा सरवारा ने सरकार द्वारा मनाए जा रहे ‘समरसता पखवाड़े’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सामाजिक समरसता का संदेश वास्तव में सरकार की नीति और नीयत का हिस्सा है,तो सफाई कर्मचारियों के साथ न्याय करने से बेहतर इसकी मिसाल नहीं हो सकती।उन्होंने कहा कि समरसता केवल मंचों से भाषण देने और समारोह आयोजित करने से स्थापित नहीं होती।समाज के उस वर्ग को सम्मान, अधिकार और सुरक्षा देना जरूरी है,जो वर्षों से दूसरों के लिए स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करता आया है।
कर्मचारियों के बीच बैठकर खाया लंगर, सुनीं समस्याएं
चित्रा सरवारा ने आंदोलनरत सफाई कर्मचारियों के बीच बैठकर लंगर भी ग्रहण किया और उनकी समस्याओं एवं मांगों को विस्तार से सुना। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की सभी प्रमुख मांगों को एक ज्ञापन के रूप में तैयार कर सरकार के समक्ष जल्द रखा जाएगा।उन्होंने कहा कि शहर में सफाई व्यवस्था प्रभावित होना चिंता का विषय है,लेकिन इसके लिए केवल कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। यदि कर्मचारी आंदोलन के लिए मजबूर हुए हैं तो सरकार और प्रशासन को भी आत्ममंथन करना चाहिए कि ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई।
सरकार सख्ती नहीं, संवाद का रास्ता अपनाए : चित्रा
चित्रा सरवारा ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों के साथ टकराव का रास्ता छोड़कर बातचीत की मेज पर आना चाहिए। नोटिस देने, वेतन रोकने या काटने अथवा किसी अन्य प्रकार का दबाव बनाने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
