चंबा-: चंबा के विकास और जिले के पिछड़ेपन को लेकर हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन के चंबा के विकास को लेकर दिए गए बयानों पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कड़ा पलटवार किया है।उन्होंने महाजन के राजनीतिक सफर और पूर्व में सत्ता में रही उनकी भूमिका का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि यदि इतने वर्षों तक प्रभावशाली पदों पर रहने के बावजूद चंबा विकास की दौड़ में पीछे है,तो इसकी जवाबदेही कौन लेगा?
पत्रकारों से बातचीत के दौरान पठानिया ने कहा कि चंबा की राजनीति और यहां की समस्याओं को समझने के लिए किसी को उन्हें नसीहत देने की जरूरत नहीं है।उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास केवल राजनीतिक दावों और बड़े नेताओं तक पहुंच होने से नहीं होता,बल्कि इसका आकलन धरातल पर हुए कार्यों से किया जाता है।
पुराने राजनीतिक प्रभाव पर उठाए सवाल
कुलदीप सिंह पठानिया ने चंबा के राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जिले के कई प्रभावशाली राजनीतिक परिवार लंबे समय तक सत्ता के करीब रहे हैं।ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उनके राजनीतिक प्रभाव का लाभ जिले की जनता को कितना मिला।उन्होंने कहा कि चंबा में आज भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं,सड़कों,शिक्षा और रोजगार की जरूरत बनी हुई है।ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना अब भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में नेताओं को केवल अपने राजनीतिक रसूख का जिक्र करने के बजाय यह बताना चाहिए कि उन्होंने जिले के विकास के लिए क्या ठोस प्रयास किए।
‘हमें राजनीति का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं’
हर्ष महाजन के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए पठानिया ने कहा कि राजनीति का वास्तविक अर्थ जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना है।केवल बयान देने या प्रभावशाली लोगों तक पहुंच होने से जनता की मुश्किलें दूर नहीं होतीं।उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी नेता की केंद्र सरकार तक मजबूत पहुंच है,तो उसका लाभ चंबा के विकास के लिए उठाया जाना चाहिए।जिले की जनता को ऐसी राजनीतिक पहुंच का फायदा योजनाओं,परियोजनाओं और बेहतर सुविधाओं के रूप में मिलना चाहिए।
चुनावी राजनीति और राजनीतिक सफर पर भी टिप्पणी
पठानिया ने हर्ष महाजन के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए उनके मंत्री पद पर रहने के दौर को भी चर्चा में लाया।उन्होंने सवाल उठाया कि राजनीतिक जिम्मेदारियों और सत्ता के करीब रहने के दौरान चंबा के लिए कितने प्रभावी कदम उठाए गए।उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति में जनता के बीच जाकर अपने काम का हिसाब देना भी महत्वपूर्ण होता है।नेताओं की वास्तविक उपलब्धियों का मूल्यांकन उनके पदों या राजनीतिक संपर्कों से नहीं,बल्कि जनता के जीवन में आए बदलाव से होना चाहिए।
केंद्र को झुकाने के दावे पर पलटवार
हर्ष महाजन के केंद्र सरकार पर प्रभाव डालने संबंधी बयान पर भी पठानिया ने सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार से चंबा के हित में फैसले करवाने की क्षमता है,तो जिले की पुरानी समस्याओं के समाधान के लिए उसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।पठानिया के अनुसार,चंबा की जनता को यह जानने का अधिकार है कि जिले के लिए कितनी योजनाएं और परियोजनाएं लाई गईं,कितनी मंजूर हुईं और उनका लाभ लोगों तक किस हद तक पहुंचा।उन्होंने संकेत दिया कि विकास के दावों की असली कसौटी जमीनी नतीजे हैं। इसलिए राजनीतिक प्रभाव की चर्चा के साथ-साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उससे जिले को क्या हासिल हुआ।
वीरभद्र सरकार में भूमिका का भी किया जिक्र
पठानिया ने हर्ष महाजन के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ जुड़े राजनीतिक दौर का उल्लेख करते हुए उनकी पुरानी जिम्मेदारियों पर भी सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि जब कोई नेता लंबे समय तक प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व के साथ काम करता है,तो उसके राजनीतिक अनुभव और प्रभाव से क्षेत्र को लाभ मिलने की अपेक्षा की जाती है।उन्होंने सवाल किया कि यदि उस दौरान चंबा के विकास के लिए पर्याप्त प्रयास हुए थे, तो जिले को आज भी पिछड़ेपन से जुड़ी चुनौतियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है।
विकास के मुद्दे पर कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने
चंबा में विकास को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज होते नजर आ रहे हैं।हर्ष महाजन जहां केंद्र सरकार के स्तर पर जिले के लिए योजनाएं और संसाधन जुटाने की बात कर रहे हैं,वहीं पठानिया उनके दावों को पुराने राजनीतिक रिकॉर्ड और वर्तमान विकास की स्थिति के आधार पर चुनौती दे रहे हैं।इस राजनीतिक बहस के केंद्र में दो अहम सवाल हैं। पहला, केंद्र सरकार से चंबा के लिए कितने संसाधन और परियोजनाएं हासिल की गईं? दूसरा,लंबे समय तक सत्ता और राजनीतिक प्रभाव रखने वाले नेताओं के प्रयासों से जिले को कितना लाभ मिला?
बयानबाजी से आगे अब विकास के काम पर नजर
हर्ष महाजन और कुलदीप सिंह पठानिया के बीच ताजा बयानबाजी ने चंबा की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। दोनों पक्षों के बयानों के बीच अब जिले के विकास,बुनियादी सुविधाओं और रोजगार जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं।पठानिया ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि चंबा के विकास की बात करने वाले नेताओं को अपने पुराने कार्यकाल और योगदान पर भी सवालों का जवाब देना चाहिए।वहीं,इस पूरे विवाद के बीच चंबा की जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यही है कि राजनीतिक दावों के बीच जिले के विकास को कितनी गति मिलती है।
