शिमला,संजू-:नेपाल में हुई भीषण प्राकृतिक त्रासदी पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गहरा दुख व्यक्त किया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल में आई आपदा बेहद गंभीर है और सूत्रों के अनुसार 133 भारतीय नागरिकों के लापता होने की सूचना सामने आई है।हालांकि,हिमाचल प्रदेश के किसी नागरिक के लापता होने को लेकर अभी तक केंद्र सरकार की ओर से उन्हें कोई आधिकारिक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की जान जाना बेहद पीड़ादायक और आघात पहुंचाने वाला है।मुख्यमंत्री ने नेपाल की त्रासदी को जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव से जोड़ते हुए कहा कि मौसम का स्वरूप तेजी से बदल रहा है।उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2023-24 में हिमाचल प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी उन्होंने जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी। उनका कहना है कि आने वाले समय में इसका असर हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड और पूरे हिमालयी क्षेत्र में देखने को मिल सकता है।नेपाल में हुई त्रासदी के बाद हिमाचल प्रदेश विधानसभा में दिवंगत लोगों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। हिमालयी राज्यों में भौगोलिक परिस्थितियां समान होने के कारण एक क्षेत्र में सामने आने वाली घटनाएं दूसरे क्षेत्रों के लिए भी चेतावनी का संकेत हो सकती हैं। सीएम सुक्खू ने कहा कि वर्ष 2023-24 की आपदाओं के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन को लेकर लगातार बैठकें की हैं। तेज बारिश, बादल फटने और नदियों में अचानक बाढ़ जैसी परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन को समय रहते अलर्ट जारी करने के निर्देश दिए जाते हैं।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई है,लेकिन जिन क्षेत्रों में तेज बारिश या बादल फटने की घटनाएं होती हैं,वहां स्थानीय प्रशासन को पहले से सतर्क किया जाता है,ताकि जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ रही प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव का केवल हिमाचल या भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे एशियाई क्षेत्र में व्यापक अध्ययन किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि हिमाचल में वर्ष 2023-24 की आपदाओं के बाद उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात कर आईआईटी, पर्यावरण विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की टीम के माध्यम से विस्तृत अध्ययन करवाने की मांग की थी। इसके बाद विशेषज्ञों की एक टीम हिमाचल प्रदेश में अध्ययन के लिए पहुंची थी। हालांकि, उस अध्ययन के बाद क्या निष्कर्ष सामने आए और उन पर आगे क्या कार्रवाई हुई,इसकी जानकारी अभी उन्हें नहीं है।सुक्खू ने कहा कि उनके अनुभव के आधार पर बादल फटने की घटनाओं के पीछे जलवायु परिवर्तन एक बड़ा कारण हो सकता है। मौसम में हो रहे बदलाव के कारण ऐसी घटनाओं की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ने से आपदाओं में होने वाला नुकसान भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। पहाड़ों के कटाव के बाद कुछ समय तक भूस्खलन की घटनाएं होती रहती हैं और परिस्थितियों को सामान्य होने में समय लगता है। प्रधानमंत्री की ओर से घोषित 1500 करोड़ रुपये की राहत राशि के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी प्रक्रिया फिलहाल दिल्ली स्तर पर चल रही है। जब तक केंद्र सरकार की ओर से औपचारिक मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक हिमाचल प्रदेश यह नहीं मान सकता कि राहत की 1500 करोड़ रुपये की राशि राज्य को मिल चुकी है।लॉटरी को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉटरी भाग्य का खेल है और किसी भी व्यक्ति पर इसे खरीदने की बाध्यता नहीं है। उन्होंने कहा कि जिसकी इच्छा होगी, वही लॉटरी खरीदेगा। विपक्ष की ओर से इस संबंध में दिए गए पत्र और उठाए गए सवालों पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी।मुख्यमंत्री ने ग्लेशियर झीलों को लेकर भी सरकार की सतर्कता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में एक ग्लेशियर झील बनने की जानकारी सामने आई है, जो काफी वर्षों से मौजूद है। इस विषय पर ग्लेशियरों का अध्ययन करने वाले अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ बैठक भी की गई है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में ग्लेशियरों का आकार कम हो रहा है, जबकि कुछ स्थानों पर इनके बढ़ने की स्थिति भी सामने आ रही है। इसलिए वास्तविक स्थिति का आकलन वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही किया जा सकता है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली को लेकर मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सड़क की स्थिति ठीक नहीं है तो वाहन चालकों से टोल टैक्स क्यों लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। वहीं, फोरलेन परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण का खर्च हिमाचल प्रदेश से मांगे जाने को भी उन्होंने अनुचित बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के संसाधन सीमित हैं और प्रदेश पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है।उन्होंने कहा कि हिमाचल अपने जल संसाधनों से जुड़ी रॉयल्टी का 50 प्रतिशत हिस्सा मांग रहा है। इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र भी भेजे गए हैं। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि इन सभी मामलों पर आगे नीतिगत स्तर पर निर्णय लेने की आवश्यकता है। रक्षाबंधन पर अवकाश घोषित करने के फैसले पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बहनों और बेटियों के लिए छुट्टी का प्रावधान था, लेकिन इस बार सरकार ने पूरे हिमाचल प्रदेश में कार्यालयों, स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश घोषित किया है। उन्होंने कहा कि भाई-बहन के भावनात्मक रिश्ते से जुड़े इस त्योहार को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, ताकि बहनें बिना किसी परेशानी के अपने भाइयों को राखी बांध सकें और परिवार के साथ त्योहार मना सकें।
