शिमला,संजू-किन्नौर कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद सामने आए हैं।राजस्व एवं बागवानी मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जगत सिंह नेगी ने नई जिला कांग्रेस कमेटी यानी DCC के गठन पर सवाल उठाए हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि पुरानी कार्यकारिणी से जुड़े नेताओं और लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला।साथ ही ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को भंग किए जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई है।जगत सिंह नेगी के मुताबिक नई जिला कांग्रेस कमेटी में 56 सदस्यों को शामिल किया गया है,लेकिन किन्नौर के कई पुराने और सक्रिय कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इसमें जगह नहीं मिली। उन्होंने दावा किया कि नई कमेटी में ऐसे लोगों को भी शामिल किया गया है,जिनकी संगठन में सक्रियता पहले सीमित रही है।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए।नेगी का कहना है कि ब्लॉक स्तर की कमेटियां पहले से संगठनात्मक गतिविधियों में काम कर रही थीं।ऐसे में जिला स्तर पर नई कमेटी के गठन के साथ ब्लॉक कमेटियों को भंग करने का फैसला संगठन के पुराने ढांचे और कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है।कांग्रेस नेता ने किन्नौर में पार्टी के पुराने संगठनात्मक आधार का भी जिक्र किया।उनका कहना है कि क्षेत्र में कांग्रेस ने लंबे समय तक कार्यकर्ताओं की मेहनत और संगठन के माध्यम से अपनी राजनीतिक पकड़ बनाई है।ऐसे में संगठन में बदलाव करते समय पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।संगठनात्मक विवाद के बीच जगत सिंह नेगी ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए।उन्होंने आरोप लगाया कि बेरोजगारी,महंगाई और अन्य गंभीर मुद्दों पर ठोस काम करने के बजाय कई विषयों को कार्यक्रमों और आयोजनों के जरिए प्रस्तुत किया जा रहा है।नेगी ने कोविड काल का उदाहरण देते हुए ताली और थाली बजाने की अपील का जिक्र किया।उनके मुताबिक सरकार की प्राथमिकता गंभीर समस्याओं के समाधान पर होनी चाहिए,न कि उन्हें केवल आयोजनों के जरिए प्रस्तुत करने पर।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं को लेकर भी सवाल उठाए। नेगी ने आरोप लगाया कि विदेशों में बसे भारतीयों की बड़ी सभाएं आयोजित कर प्रधानमंत्री के समर्थन में नारे लगाए जाते हैं और इसे उन्होंने ‘इवेंट मैनेजमेंट’ की राजनीति बताया।
वहीं,नेगी ने महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू के विदेश दौरों का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय विदेश यात्राओं को विचारों,कूटनीति और राष्ट्रीय हितों से जोड़कर देखा जाता था।उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों और विदेश नीति को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए।
