अंबाला-:अंबाला कैंट की अनाज मंडी में धान की बंपर आवक के बावजूद किसान सरकारी खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। सितंबर के पहले सप्ताह से ही किसान अपनी धान की फसल लेकर मंडी पहुंच रहे हैं, लेकिन सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। किसानों का कहना है कि फसल बिकने के बाद ही उन्हें अगली फसल की तैयारी के लिए पैसे मिल पाएंगे। वहीं मंडी सचिव के मुताबिक अभी तक करीब 38 हजार क्विंटल धान मंडी में पहुंच चुका है और मौजूदा आदेशों के अनुसार सरकारी खरीद एक अक्टूबर से शुरू होने की संभावना है।
अंबाला कैंट की अनाज मंडी में इन दिनों धान से भरी ट्रॉलियों की कतारें नजर आ रही हैं। किसान सितंबर के पहले सप्ताह से ही अपनी तैयार फसल लेकर मंडी पहुंच रहे हैं,लेकिन सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के चलते उन्हें मंडी में ही इंतजार करना पड़ रहा है।किसानों का कहना है कि उनकी पूरी आर्थिक व्यवस्था फसल की बिक्री पर निर्भर है।जब तक धान बिकेगा नहीं, तब तक उन्हें पैसे नहीं मिलेंगे और आगे के कृषि कार्य भी प्रभावित होंगे।किसानों के मुताबिक उन्हें आलू की फसल लगानी है,तोड़िया की बुवाई करनी है और गेहूं की फसल के लिए खेत तैयार करने हैं। लेकिन धान की बिक्री में देरी होने के कारण अगली फसल की तैयारियां भी प्रभावित हो रही हैं।किसानों ने कहा कि मंडी में फसल लेकर बैठने के अलावा उनके पास फिलहाल कोई दूसरा रास्ता नहीं है। उनका कहना है कि हर दिन की देरी उनके लिए आर्थिक परेशानी बढ़ा रही है।
वहीं,अनाज मंडी सचिव के मुताबिक अंबाला कैंट मंडी में अब तक करीब 38 हजार क्विंटल धान की आवक हो चुकी है।उन्होंने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी धान की आवक सरकारी खरीद शुरू होने से पहले ही शुरू हो गई है।फिलहाल किसान मंडी में अपनी फसल को सुखा रहे हैं।मंडी सचिव ने बताया कि मौजूदा सरकारी आदेशों के अनुसार धान की सरकारी खरीद एक अक्टूबर से शुरू होनी है। अगर इससे पहले नए आदेश जारी होते हैं तो मंडी खरीद के लिए पूरी तरह तैयार है।उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए मंडी में पीने के पानी के कूलर, स्वच्छ शौचालय और किसान मजदूर अटल कैंटीन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है,जहां किसान 10 रुपये में खाना खा सकते हैं।मंडी सचिव ने यह भी बताया कि मौसम खराब होने की स्थिति में आढ़तियों के पास पर्याप्त मात्रा में तिरपाल और पॉलीथिन उपलब्ध हैं।अगर बारिश के कारण किसी किसान की फसल भीगती है तो उसकी जिम्मेदारी आढ़तियों की होगी।
