शिमला/संजू-:कांग्रेस के शिमला ग्रामीण अध्यक्ष हरिकृष्ण हिमराल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।हिमराल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनी चयन समिति की संरचना और निर्वाचन आयुक्तों को मिले कानूनी संरक्षण पर सवाल उठाए हैं।उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग भी उठाई।
कानूनी प्रावधानों पर कांग्रेस के सवाल
हरिकृष्ण हिमराल ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता के साथ उसकी जवाबदेही और पारदर्शिता भी सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने 2023 के कानून की धारा 7 और धारा 16 का हवाला देते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में हुए बदलाव और निर्वाचन आयुक्तों को मिले कानूनी संरक्षण पर चर्चा की जरूरत बताई।2023 के कानून के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2023 के अपने फैसले में संसद द्वारा कानून बनाए जाने तक प्रधानमंत्री,लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली व्यवस्था का निर्देश दिया था।
धारा 16 को लेकर भी आपत्ति
कानून की धारा 16 के मुताबिक,निर्वाचन आयुक्तों द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए कार्यों से जुड़े सिविल या आपराधिक मामलों को अदालत द्वारा स्वीकार या जारी नहीं रखा जा सकता।इसी प्रावधान को लेकर हिमराल ने सवाल उठाए।हिमराल ने एसआईआर को लेकर भी चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए।उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए हैं।इन आरोपों के आधार पर उन्होंने सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने और उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग की।हिमराल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की।उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाताओं के अधिकार और चुनाव आयोग की जवाबदेही के मुद्दे को लेकर अपना अभियान जारी रखेगी।
