आपदा का बीता एक साल लेकिन नहीं बदले सैंज घाटी के हालात

कुल्लू/मनमिंदर अरोड़ा -:हिमाचल प्रदेश में अब एक बार फिर से मानसून का सीजन शुरू हो गया है।साल 2023 और 2025 की बारिश के चलते प्रदेश में सैकड़ों लोगों की जान चली गई और करोड़ों रुपए की संपत्ति नष्ट हो गई। लेकिन आपदा का 1 साल बीतने के बाद भी धरातल पर कोई ठोस कार्य नहीं हो पाए हैं। जिला कुल्लू के उपमंडल बंजार की सैंज घाटी की बात करें तो यहां पर साल 2023 और 2025 की आपदा में कई लोगों की जान चली गई और करोड़ों रुपए की संपत्ति नष्ट हो गई। ऐसे में 1 साल बीतने के बाद भी यहां हालात में कोई सुधार नहीं आया है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब आपदा आती है तो सहानुभूति जताने के लिए प्रशासन और सरकार के प्रतिनिधि यहां पहुंचते हैं। लेकिन उसके बाद घाटी को भूल जाते हैं।अगर 1 साल के भीतर आपदा से निपटने की तैयारी की गई होती। तो यहां लोगों को काफी राहत मिलती। लेकिन साल 2025 की आपदा के बाद से लेकर अभी तक यहां पर कई सड़कें बंद पड़ी हुई है और लोगों को पैदल चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।सैंज घाटी के ग्राम पंचायत बनोगी की प्रधान आशा राणा ने बताया कि आज भी कई जगह ऐसी है जो कभी भी भूस्खलन की चपेट में आ सकती है।उनकी पंचायत की अगर बात करें तो यहां पर कई ग्रामीण इलाकों में बस सेवाएं आज भी बंद पड़ी हुई है और लोगों को या तो टैक्सियों में सफर करना पड़ रहा है या फिर उन्हें पैदल चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।सबसे अधिक दिक्कत कॉलेज तथा स्कूल जाने वाले छात्रों को उठानी पड़ रही है। बीते एक साल में यहां प्रशासन के द्वारा कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं।

ग्राम पंचायत धाऊगी के प्रधान जीत ठाकुर का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में सड़कों के हाल काफी खराब है और जगह-जगह पर अभी भी मलबा गिरा हुआ है। जिसके चलते परिवहन की सुविधा लोगों को नहीं मिल पा रही है।बीते साल जहां भूस्खलन हुआ था। वह जगह अभी भी डेंजर जोन में है। लेकिन ना तो यहां पर कोई सुरक्षा दीवार लगाई गई या और ना ही किसी अन्य तरह के इंतजाम किए गए।अगर इस साल फिर से मानसून में बारिश अधिक आती है तो इससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ जाएगी।

सैंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष झाबे राम ने बताया कि मुख्य बाजार को जोड़ने वाली सड़क अभी भी पक्की नहीं हो पाई है। यहां पर उस कच्ची सड़क को बचाने के लिए जो सुरक्षा दीवार दी गई है वह नाम मात्र की है। अगर सैंज नदी में बाढ़ आती है। तो वह सड़क फिर से बह जाएगी और सैंज बाजार का संपर्क भी आपस में कट जाएगा। सरकार और प्रशासन के द्वारा आपदा के बाद सैंज घाटी को लावारिस छोड़ दिया गया है।ग्राम पंचायत रैला के उप प्रधान पराग ठाकुर ने बताया कि जीवानाला में एक कृत्रिम झील भी बनी हुई है। हालांकि इस बारे प्रशासन को पहले भी सूचित किया गया। लेकिन प्रशासन के द्वारा उस झील को खोलने के लिए कोई कार्य नहीं किया गया। अगर पहाड़ों पर बादल फटता है तो वह झील विकराल रूप धारण करेंगी। जिससे करोड़ों रुपए की संपत्ति नष्ट हो जाएगी। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि वह उस झील को तोड़ने की दिशा में काम करें।

ग्राम पंचायत रैला के प्रधान टेक सिंह ने बताया कि उनकी पंचायत की सड़क अभी भी ठीक नहीं हो पाई है। इस बारे जब प्रशासन से बात की जाती है तो वह कहता है कि यह सड़क एनएचपीसी के अधीन है और एनएचपीसी इस लोक निर्माण विभाग की सड़क बता रहा है। इस मुद्दे को लोक निर्माण विभाग मंत्री के समक्ष भी रखा गया है। इस साल बारिश के सीजन में लोगों की मुश्किलें और ना बढ़े। इसके लिए प्रशासन और सरकार को चाहिए कि वो इस सड़क की मरम्मत करें। ताकि लोगों को आवागमन की सुविधा मिल सके।

Ekta TSN

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