मंडी, 21 अगस्त ( TSN)-इलाका द्रंग की सनोर घाटी के प्रसिद्ध देवता ऋषि बरनाग करीब 8 दशकों के लंबे अंतराल के बाद मंडी जनपद पधारे हैं। इस दौरान देवता के साथ करीब एक हजार से ज्यादा भक्त भी ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमते गाते हुए मंडी शहर पहुंचे । बरनाग ऋषि के आगमन से भादो के काले मास में छोटी काशी मंडी देवमई नजारा देखने को मिला।
भाद्रपद के काले महीने में बरनाग ऋषि के आगम ने देव मई हो गई छोटी काशी मंडी
बरनाग देवता अपने स्थान सनोड़ से गाड़ी के माध्यम से मंडी तक आए और इसके बाद माता भीमाकाली मंदिर से राज माधव राय मंदिर तक पैदल यात्रा कर पहुंचे। देवता के इतने लंबे अंतराल के बाद शहर पहुंचने पर आम लोगों के साथ कई संस्थाओं ने भी देवता का स्वागत किया। राज माधव राय मंदिर पहुंचने पर देवता बरनाग ऋषि का स्वागत सर्व देवता समिति मंडी व माधव राय मंदिर के पुजारी ने फूल मालाओं और धूप दीप के साथ किया। जानकारी के अनुसार देवता किसी भक्त के बुलावे पर मेहमान नवाजी के लिए मंडी शहर में पधारे हैं जिनके दर्शनों के लिए भक्तों का तांता लग गया। इस मौके पर सर्व देवता समिति के जिला अध्यक्ष शिव पाल शर्मा ने बताया कि बरनाग ऋषि प्राचीन देवताओं में से एक है और 1945 के बाद इन्होंने आज दिन तक शिवरात्रि में शिरकत नहीं की है। ऋषि बरनाग का राजपरिवार के साथ गहरा नाता रहा है और शिवरात्रि की जलेब में यह देवता राजमाधव राय की पालकी के साथ चलते थे।
पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू के आग्रह पर परेड़ में शामिल होने के लिए पहंचे थे दिल्ली
वहीं देवता के गुर नितिन ठाकुर ने बताया कि बरनाग ऋषि को भगवान शेषनाग जी का अवतार माना गया है। यह बीमारियों से मुक्ति दिलाने वाले और बिजली बादल के देवता माने गए हैं। उन्होंने बताया कि यह पराशर ऋषि के कटवाल भी हैं और हर वर्ष सरानाहुली के दौरान पराशर मेले में शिरकत करते हैं। उन्होंने बताया कि देवता मंडी शिवरात्रि में भी शिरकत करते थे लेकिन राजाओं के राज समाप्त होने के बाद वह मंडी शिवरात्रि मेले में नहीं आए हैं। आज देवता अपने भक्त के बुलावे पर मंडी शहर में आए हैं और फिर अपने स्थान के लिए लौट जाएंगे। उन्होंने बताया कि बरनाग ऋषि 1954 में पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के आग्रह पर दिल्ली में परेड में भी शामिल हो चुके हैं। उस समय प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा देवता को सम्मानित भी किया गया था।
