अंबाला-:कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) द्वारा सुपर स्पेशियलिटी उपचार के लिए लागू की गई नई रेफरल व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध बढ़ता जा रहा है। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता,अंबाला शहर के विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री निर्मल सिंह ने नई व्यवस्था को कर्मचारियों के हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
निर्मल सिंह ने कहा कि कर्मचारी राज्य बीमा योजना कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं के नियमित अंशदान से संचालित होती है। ऐसे में बीमित कर्मचारियों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना ईएसआईसी की जिम्मेदारी है।उन्होंने आरोप लगाया कि नई रेफरल प्रक्रिया के कारण गंभीर मरीजों को उपचार के लिए अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा,जिससे इलाज में देरी होने की आशंका बढ़ जाएगी।उन्होंने बताया कि 28 अप्रैल 2023 को ईएसआईसी मुख्यालय द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया था कि जिन उपचार सुविधाओं की व्यवस्था ईएसआईसी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है,उन मरीजों को पहले अन्य ईएसआईसी अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों, फिर सरकारी संस्थानों और अंत में आवश्यकता होने पर निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में रेफर किया जाए।इसके बाद 3 जुलाई 2026 को ईएसआईसी स्वास्थ्य सेवा,करनाल द्वारा रेफरल प्रक्रिया की निगरानी संबंधी निर्देश जारी किए गए,जबकि 4 जुलाई 2026 को ईएसआईसी औषधालय,अंबाला छावनी ने अधीनस्थ केंद्रों को निजी अस्पताल भेजने से पहले विशेषज्ञ चिकित्सक की अनिवार्य राय लेने के आदेश दिए।
निर्मल सिंह का कहना है कि इन निर्देशों के बाद किसी भी गंभीर मरीज को पहले ईएसआईसी औषधालय,फिर ईएसआईसी अस्पताल अथवा सरकारी अस्पताल और वहां की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही निजी अस्पताल में रेफर किया जाएगा।उन्होंने इसे गंभीर रोगियों के लिए समय की बर्बादी बताते हुए कहा कि कई बीमारियों में उपचार में हुई थोड़ी-सी देरी भी मरीज के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।उन्होंने कहा कि यदि ईएसआईसी के पास किसी विशेष बीमारी के उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो बीमित कर्मचारी को सीधे मान्यता प्राप्त सूचीबद्ध अस्पताल में उपचार का अवसर मिलना चाहिए।यदि कोई कर्मचारी अपनी पसंद के सूचीबद्ध अस्पताल में इलाज कराना चाहता है, तो केवल औपचारिकताओं के आधार पर उसे रोकना उचित नहीं है।
पूर्व मंत्री ने सवाल उठाया कि जब कर्मचारी और नियोक्ता दोनों नियमित रूप से ईएसआईसी में अंशदान जमा कर रहे हैं, तो फिर लाभार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में अनावश्यक बाधाएं क्यों पैदा की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारी हितों से जुड़े मामलों में मरीज की सुविधा, समय पर इलाज और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।निर्मल सिंह ने राज्य सरकार और कर्मचारी राज्य बीमा निगम से मांग की कि नई रेफरल व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से वापस लेकर पूर्व व्यवस्था बहाल की जाए, ताकि बीमित कर्मचारियों और उनके आश्रितों को बिना अनावश्यक देरी के बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया,तो कांग्रेस कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती से उठाएगी।
