कुल्लू : मनमिंन्द्र अरोड़ा ( TSN)-हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों में कहीं परंपराएं देवी देवताओं पर आधारित है। यहां पर देवी देवताओं की आज्ञा से जहां विवाह आदि शुभ कर्म किए जाते हैं। तो वही खेती-बाड़ी से जुड़े हुए कार्य भी देवी देवताओं की आज्ञा से किए जाते हैं। मनाली के सिमसा गांव में भी देवता अपने धान के खेतों की परिक्रमा करते हैं और छोटे बच्चों के साथ यहां कीचड़ में भी खूब खेलते हैं। इस बात का कोई भी ग्रामीण बुरा नहीं मानता और वह इस देव प्रक्रिया में शामिल होकर हंसी-खुशी से इस पूरे कार्य को अंजाम देते हैं।
देवता की शक्ति से धान की खेती होती है तैयार
जिला कुल्लू की पर्यटन नगरी मनाली के साथ लगते सिमसा गांव में देवताओं की सेनापति कार्तिक स्वामी अपने भूमि पर बिजी गई धान की खेती की परिक्रमा करते हैं और छोटे बच्चों के साथ कीचड़ में भी खूब मस्ती करते हैं। हर साल श्रावण मास में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इतना ही नहीं इस कार्यक्रम के 15 दिनों के बाद देवता की शक्ति से धान की खेती भी तैयार हो जाती है।
दशकों से निभाई जा रही देव परंपरा
देवता कार्तिक स्वामी मंदिर के पुजारी मकरध्वज शर्मा और केशव शर्मा ने बताया कि सदियों से चली आ रही परंपरा को आज भी लोगों ने कायम रखी है। उन्होंने कहा कि मनाली के सिमसा गांव में भगवान कार्तिक स्वामी का प्राचीन मंदिर है। जहां भगवान कार्तिकेय स्वामी निवास करते हैं। उन्होंने बताया कि श्रावण मास में भगवान कार्तिकेय स्वामी का रथ मंदिर से बाहर निकाला जाता है। कार्तिक स्वामी पूरे गांव की परिक्रमा करते हैं तथा इस दौरान वे गांव के मध्य में स्थित धान के एक खेत में पहुंचकर यहां पर बच्चों के साथ देव धुन पर मिट्टी में भी खेलते हैं। गांव के बच्चे देवता के ऊपर धान के खेत की मिट्टी को फेंकते हैं और देवता भी इसे सहर्ष स्वीकार करते है । धान की बालियों को देवता के रथ के ऊपर सजाया जाता है और सभी ग्रामीण इस कार्यक्रम में शामिल होते है।
