कुल्लू, मनमिंदर अरोड़ा -हिमाचल प्रदेश का जनजातीय जिला लाहौल स्पीति, जहां पर बौद्ध और हिंदू धर्म को मानने वाले लोग हर साल अपनी पुरानी परंपराओं का पालन करते हैं। ऐसे में भगवान शिव के भी कई प्राचीन मंदिर लाहौल घाटी में है और भगवान शिव को आज भी यहां के लोग अपना आराध्य देवता मानते हैं। भगवान शिव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के मन में इतना जुनून कि वह 90 किलोमीटर खड़ी चढ़ाई पैदल पार कर चंबा जिला के मणिमहेश पहुंचते हैं और यहां पर मणिमहेश झील में स्नान कर भगवान शिव की पूजा आराधना करते हैं।
इस साल भी जिला लाहौल स्पीति के उदयपुर से 350 श्रद्धालुओं का जत्था मणिमहेश यात्रा के लिए रवाना हो गया है। इसमें 50 से अधिक महिलाएं भी शामिल है। जो करीब 6 दिनों तक पैदल चलकर मणिमहेश की यात्रा को पूरी करेंगे। उदयपुर से यह श्रद्धालुओं का जत्था अब मणिमहेश के लिए रवाना हो गया है और कई दुर्गम रास्ते, ऊंचे ग्लेशियर को पार करते हुए यह सभी मणिमहेश में स्नान कर भगवान शिव की पूजा आराधना भी करेंगे। हर साल पोरी मेले के समापन के बाद श्रद्धालुओं का जत्था मणिमहेश की ओर रवाना होता है और झील में स्नान करने के बाद इसी रास्ते से वह वापस भी लौट आते हैं। यह पूरी यात्रा खतरनाक रास्तों को पार कर होती हैं और इस पूरे रास्ते में श्रद्धालु पहाड़ों में बनी गुफाओं में अपना डेरा डालते है। श्रद्धालु अपने साथ खाने पीने का सामान लेकर जाते है। श्रद्धालुओं के जत्थे का पहला रात्रि पड़ाव थिरोट के समीप होगा। उसके बाद रापे गांव की कुछ दूरी पर और 20 अगस्त को तीसरा रात्रि पड़ाव खोलड़ु पधर से एक किलोमीटर आगे होगा। 21 अगस्त को केलिंग मंदिर और 22 अगस्त को अलियास, 23 को छठे दिन यह जत्था पवित्र झील मणिमहेश पहुंचेगा।
