हर महीने मासिक धर्म आना महिलाओं के लिए अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है। इस बीच किसी को कम तो किसी को ज्यादा दर्द, ऐंठन और शरीर में कमजोरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हालाँकि, कई महिलाओं के लिए यह अवधि भारी रक्तस्राव के कारण बहुत दर्दनाक हो जाती है। शरीर से ज्यादा खून बहने से एनीमिया समेत कई बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में हर महिला 3 से 5 दिन जल्दी गुजारना चाहती है और परेशानियों से बचना चाहती है। लेकिन आपको बता दें कि इन समस्याओं के लिए हमारी कुछ आदतें भी जिम्मेदार होती हैं।
वजन में बदलाव:
अचानक वजन बढ़ने या घटने से पीरियड्स के दौरान दिक्कतें बढ़ सकती हैं। अधिक वजन होने से एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ सकता है और हार्मोनल असंतुलन हो सकता है। कम वजन होने से एस्ट्रोजन की कमी हो सकती है। जिसके कारण अनियमित पीरियड्स, खराब मूड और कम मासिक धर्म प्रवाह जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
अत्यधिक व्यायाम:
पीरियड्स के दौरान अत्यधिक व्यायाम भी हानिकारक हो सकता है। अत्यधिक व्यायाम से शरीर पर तनाव पड़ सकता है और अनियमित मासिक धर्म हो सकता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भारी व्यायाम करने के बजाय तैराकी, एरोबिक्स और पैदल चलना जैसे हल्के व्यायाम करना बेहतर है।
तनाव:
अत्यधिक तनाव का भी पीरियड्स पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। तनाव के कारण हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। इसके अलावा, तनाव के कारण पेट में दर्द और ऐंठन हो सकती है। तनाव के कारण मूड में बदलाव और सिरदर्द हो सकता है।
नींद की कमी:
नींद की कमी से कई स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं और पीरियड्स में भी परेशानी होती है। नींद की कमी के कारण मेलाटोनिन का स्तर बाधित हो सकता है, जिससे मासिक धर्म के लक्षण बढ़ सकते हैं। पीरियड्स के दौरान 7 से 8 घंटे की नींद लेने की कोशिश करें।
अत्यधिक कैफीन का सेवन:
अत्यधिक कैफीन का सेवन पीरियड्स के लक्षणों को बढ़ा सकता है। अत्यधिक कैफीन के सेवन से रक्त प्रवाह बढ़ सकता है और नींद आने में कठिनाई हो सकती है। इस समस्या के साथ-साथ चिंता, अनिद्रा, तनाव और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण भी बढ़ जाते हैं।
