शिमला -:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देशवासियों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील के बाद हिमाचल प्रदेश के सराफा कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है। प्रधानमंत्री ने इस अपील को देश के राजकोषीय घाटे को कम करने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक कदम बताया है, लेकिन ज्वेलर्स संगठनों का कहना है कि इसका सीधा असर लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ेगा।
हिमाचल प्रदेश ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल टांगरी ने प्रधानमंत्री के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पहले से ही महंगाई और मंदी की मार झेल रहे कारोबारियों के लिए यह अपील बड़ी चुनौती बन सकती है। उनका कहना है कि सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण बाजार पहले ही धीमा चल रहा है। जो सोना कुछ साल पहले 5 से 6 लाख रुपये में आता था, उसकी कीमत अब 12 से 14 लाख रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे में आम ग्राहक खरीदारी से पीछे हट रहे हैं।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद ग्राहकों का विश्वास और कमजोर पड़ सकता है। हिमाचल प्रदेश में करीब 2500 छोटे और बड़े ज्वेलर्स इस कारोबार से जुड़े हैं, जबकि लगभग 60 हजार लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सराफा व्यापार पर निर्भर है। यदि कारोबार और कमजोर हुआ तो बड़ी संख्या में लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।
अतुल टांगरी ने कहा कि ज्वेलर्स एसोसिएशन प्रधानमंत्री के आर्थिक विजन का सम्मान करती है, लेकिन जमीनी हालात अलग हैं। उनका कहना है कि सराफा बाजार पहले ही मुश्किल दौर से गुजर रहा है और ऐसे बयान व्यापार को और प्रभावित कर सकते हैं। इसी को लेकर जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर ज्वेलर्स संगठन प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस अपील पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि देशभर में करीब दो लाख सराफा कारोबारी इस उद्योग से जुड़े हैं और करोड़ों लोगों की आजीविका इसी व्यवसाय पर टिकी हुई है। यदि लोग प्रधानमंत्री की अपील को गंभीरता से लेते हुए लंबे समय तक सोना खरीदना बंद कर देते हैं, तो सराफा कारोबार पर संकट और गहरा सकता है।
