मंडी,धर्मवीर(TSN)-देशभर में होली का त्यौहार 14 मार्च को मनाया जाएगा लेकिन छोटी काशी के नाम से विख्यात मंडी शहर में हमेशा ही होली का त्यौहार एक दिन पहले मनाने की परंपरा रही है।यहां कल यानी 13 मार्च को होली का त्यौहार बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।लोगों में इस बात को जानने की बड़ी उत्सुकता है कि होली का यह त्यौहार आखिर एक दिन पहले क्यों मनाया जाता है।हमने इसे इतिहासकारों से समझने की कोशिश की।वरिष्ठ इतिहासकार डा.दिनेश धर्मपाल ने बताया कि छोटी काशी मंडी शैव और वैष्णव परंपरा वाला इकलौता शहर है। यहां भगवान शिव और भगवान श्रीकृष्ण को प्रमुख रूप से पूजा जाता है और होली की त्यौहार इन्हीं से संबंधित भी है। ऐसे स्थान पर होली का त्यौहार सबसे पहले मनाया जाना स्वभाविक और अनिवार्य है।
ज्योतिष गणना के अनुसार होली 13 मार्च को
वहीं,अगर ज्योतिष गणना की बात करें तो उसके अनुसार भी होली का त्यौहार हर वर्ष फाल्गुनी पूर्णिमा को मनाया जाता है।ज्योतिषाचार्य पंडित राम लाल शर्मा ने बताया कि इस बार फाल्गुणी पूर्णिमा 13 मार्च को सुबह 10 बजकर 36 मिनट पर शुरू हो रही है जोकि 14 मार्च को दोपहर 12 बजकर 25 मिनट तक जारी रहेगी।उन्होंने कहा कि छोटी काशी में सभी त्यौहार और पर्व शास्त्रानुसार ही मनाए जाते हैं।
प्राचीन परंपराओं के साथ अब नए रूप में दिखती है छोटी काशी की होली
छोटी काशी मंडी की होली प्राचीन पंरपराओं के साथ अब नए स्वरूप में नजर आती है।वरिष्ठ नागरिक रूपेश्वरी शर्मा बताती हैं कि पहले जहां गली-मुहल्लों में लोग एक-दूसरे को रंगे लगाते थे,वहीं अब शहर के लोग सेरी मंच पर एकजुट होकर सामूहिक तौर पर इस त्यौहार को मनाते हैं।सेरी मंच पर नाचने-गाने के बाद लोग राज माधव राय मंदिर में जाकर होली मनाते हैं।दोपहर दो बजे राज माधव राय जी की पालकी नगर भ्रमण पर निकलती है जिसपर लोग गुलाल फैंकते हैं। इस पालकी के वापिस मंदिर पहुंचते ही होली का त्यौहार संपन्न हो जाता है।रूपेश्वरी बताती हैं कि बदलते समय के साथ मंडी की होली में बहुत से बदलाव आए हैं जोकि समय की जरूरत भी होती है।
