करनाल,राकेश कुमार-:सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को निशाना बनाकर मिड-डे मील का सामान और अन्य जरूरी वस्तुएं चोरी करने वाले दो संगठित गिरोहों का करनाल पुलिस ने पर्दाफाश किया है।सीआईए-3 की टीम ने कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों और चोरी का सामान खरीदने वाले 2 कबाड़ियों को गिरफ्तार किया है।आरोपियों ने जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में 24 चोरी की वारदातों को अंजाम देने की बात कबूल की है।
पुलिस के अनुसार पिछले तीन महीनों से सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों से राशन,गैस सिलेंडर,बर्तन,इन्वर्टर और अन्य सामान चोरी होने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। कई स्थानों पर चोरी के कारण बच्चों के लिए मिड-डे मील तैयार करने में भी दिक्कतें आने लगी थीं।विभिन्न थानों में दर्ज मामलों की जांच के बाद एसपी करनाल के निर्देश पर यह जिम्मेदारी सीआईए-3 को सौंपी गई।इंस्पेक्टर अजय कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर 9 जून को चिढ़ाव मोड़ क्षेत्र से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया।पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी दो अलग-अलग गिरोहों में काम करते थे। वे दिन के समय ऑटो में घूमकर स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों की रेकी करते थे और रात के समय चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे।चोरी किए गए सामान को ऑटो के जरिए ठिकाने लगाया जाता था।जांच के दौरान पुलिस ने चोरी का माल खरीदने वाले दो कबाड़ियों को भी गिरफ्तार किया है।उनकी निशानदेही पर बड़ी मात्रा में चोरी का सामान बरामद किया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 26 गैस सिलेंडर,इन्वर्टर,बैटरियां,बर्तन,करीब साढ़े सात क्विंटल गेहूं और अन्य सामान बरामद किया है।इसके अलावा चोरी का सामान बेचकर प्राप्त किए गए 63 हजार रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं।वारदातों में इस्तेमाल किए गए दो ऑटो भी जब्त कर लिए गए हैं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने घरौंडा, मधुबन, सदर,निसिंग,असंध,कुंजपुरा और सेक्टर-32/33 थाना क्षेत्रों में सबसे अधिक वारदातों को अंजाम दिया। अब तक 14 मामलों में चोरी का सामान बरामद किया जा चुका है,जबकि अन्य मामलों में रिकवरी की कार्रवाई जारी है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि वे जिले की अन्य चोरी की घटनाओं में भी शामिल रहे हैं या नहीं।कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बरामद सामान संबंधित स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को वापस सौंपा जाएगा,जिससे बच्चों की मिड-डे मील व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।
