Shimla,Sanju-हिमाचल प्रदेश विधानसभा का 12 दिवसीय मॉनसून सत्र मंगलवार को संपन्न हो गया। यह प्रदेश के इतिहास का चौथा सबसे लंबा सत्र रहा। सत्र की कुल अवधि 59 घंटे रही और कार्यवाही की उत्पादकता 98 प्रतिशत दर्ज की गई।
सत्र का अधिकांश समय प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदा पर चर्चा में बीता।नियम 67 के तहत आपदा पर लंबी बहस के बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा गया कि इस आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने जानकारी दी कि इस दौरान आपदा पर ही लगभग 33 घंटे चर्चा चली।सत्र में 509 तारांकित और 181 अतारांकित प्रश्नों सहित कुल 690 प्रश्न पूछे गए। नियम 130 के तहत 6 विषयों,नियम 62 के तहत 12 विषयों,नियम 101 के तहत 7 विषयों और नियम 63 के तहत एक विषय पर चर्चा हुई। नियम 102 के अंतर्गत आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने पर संकल्प पारित किया गया। सदन ने 11 विधेयक पारित किए जबकि एक विधेयक वापस लिया गया।इसके अतिरिक्त शून्यकाल के दौरान 43 मुद्दे उठाए गए।
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि सत्र के दौरान 1118 विद्यार्थियों ने सदन की कार्यवाही देखी। साथ ही सदन ने विभागों द्वारा सही जानकारी न देने और उत्तरों में देरी पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए।
मुख्यमंत्री का वक्तव्य
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि अगस्त माह में आई आपदाओं ने हिमाचल को भारी क्षति पहुंचाई है।सदन ने हिमाचल को आपदा ग्रस्त राज्य घोषित किया है और राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों को संशोधित आपदा राहत मैनुअल के तहत 7 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।उन्होंने कहा कि सरकार संसाधन जुटाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और जल्द सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। साथ ही उन्होंने विपक्ष से विशेष राहत पैकेज के लिए सहयोग मांगा।सीएम ने स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव समय पर ही होंगे, सरकार के इन्हें टालने का कोई इरादा नहीं है।
विपक्ष का आरोप
विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने कहा कि आपदा से निपटने में सरकार का प्रबंधन कमजोर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में सरकार ने सही जानकारी नहीं दी और प्रश्नों के उत्तर देने में विफल रही। उन्होंने कहा कि तीन साल में सरकार की उपलब्धियां नगण्य रही हैं और भ्रष्टाचार के मामले बढ़े हैं।
जय राम ठाकुर ने कहा कि पर्यटन विकास निगम की संपत्तियों को बेचना सरकार की गलत नीतियों का उदाहरण है। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि आपदा राहत और पुनर्वास को लेकर विपक्ष सरकार के साथ खड़ा है और केंद्र से मदद दिलाने के लिए भी सहयोग देगा।
