शिमला/संजू-:हिमाचल प्रदेश के अधिकारों और आर्थिक हितों को लेकर सियासत तेज हो गई है।मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बयानों पर पलटवार करते हुए विपक्ष से प्रदेश हित के मुद्दों पर सरकार का साथ देने की अपील की है। चौहान ने कहा कि हिमाचल के लंबित आर्थिक अधिकारों, आपदा राहत और केंद्रीय मदद जैसे मुद्दों पर सरकार लगातार केंद्र के सामने अपनी बात रख रही है। ऐसे में विपक्ष को भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर प्रदेश के हितों की आवाज मजबूत करनी चाहिए।
नरेश चौहान ने कहा कि हिमाचल प्रदेश इस समय कई वित्तीय चुनौतियों से गुजर रहा है,लेकिन इसके बावजूद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार प्रदेश के अधिकारों को लेकर लगातार प्रयास कर रही है।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से मिलने वाले रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट यानी RDG की बड़ी राशि लंबित है। इसके अलावा प्राकृतिक आपदा के बाद हिमाचल ने केंद्र के समक्ष आर्थिक सहायता के लिए बड़ा क्लेम रखा है।चौहान ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य को विशेष आर्थिक पैकेज और अतिरिक्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता है।सरकार केंद्र का सहयोग मिलने पर उसका स्वागत करेगी,लेकिन विपक्ष को भी चाहिए कि वह दिल्ली में हिमाचल के लंबित मामलों को मजबूती से उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विधानसभा के भीतर भी विपक्ष से प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई मिलकर लड़ने की अपील कर चुके हैं।चौहान ने प्रदेश के जल और बिजली से जुड़े अधिकारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि BBMB में हिमाचल के हिस्से, वाटर सेस और किशाऊ बांध परियोजना जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार ने प्रदेश के हितों को प्राथमिकता दी है। उनका दावा है कि सरकार के प्रयासों के चलते बिजली परियोजनाओं में हिमाचल की हिस्सेदारी बढ़ी है और मौजूदा नीति के तहत प्रदेश को पहले की तुलना में अधिक बिजली का लाभ मिल रहा है।उन्होंने पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए बिजली समझौतों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय कई परियोजनाओं में हिमाचल को 4,8 और 12 प्रतिशत बिजली के समझौते किए गए,जबकि मौजूदा सरकार की नीति में 12, 18 और 30 प्रतिशत तक हिस्सेदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।चौहान ने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना के पूरा होने के बाद हिमाचल को मुफ्त बिजली के रूप में बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
नरेश चौहान ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के ‘सरकार गांव के द्वार’कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शिमला या जिला मुख्यालयों तक सीमित रहकर प्रशासन चलाना नहीं,बल्कि प्रदेश के दूरदराज इलाकों तक पहुंचकर लोगों की समस्याओं को समझना है।मुख्यमंत्री दुर्गम क्षेत्रों में जाकर रात्रि प्रवास कर रहे हैं और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद कर रहे हैं।डोडरा-क्वार,कुपवी,पांगी,बड़ा भंगाल,आनी-निरमंड और बागीपुल जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए चौहान ने कहा कि सरकार उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है,जिनके लिए रोजमर्रा की जिंदगी भी बड़ी चुनौती है।हाल ही में रोहड़ू के बटवाड़ी गांव में मुख्यमंत्री के रात्रि प्रवास और जड़गांव में जनसभा का जिक्र करते हुए चौहान ने कहा कि इसके बाद रामपुर क्षेत्र के काशापाट में भी मुख्यमंत्री ने नाइट स्टे किया। इस दौरान ग्रामीणों, महिलाओं और बच्चों से सीधा संवाद किया गया और सड़क, पुल,स्कूल तथा अन्य विकास कार्यों से जुड़ी समस्याओं पर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार ने प्रदेश में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि हिमाचल को चिट्टा और अन्य नशों से मुक्त बनाने के लिए जिला मुख्यालयों में मैराथन और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।इनमें बड़ी संख्या में युवा और विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं।चौहान ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है,बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सरकार प्रशासन,पुलिस और आम जनता के सहयोग से अभियान को और मजबूत कर रही है।उन्होंने कहा कि ‘सरकार गांव के द्वार’कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी योजनाओं का प्रचार करना भर नहीं है।इसका मकसद ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक समस्याओं और लोगों की अपेक्षाओं को सीधे सरकार तक पहुंचाना भी है।चौहान के मुताबिक,मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि गांवों से मिले फीडबैक और स्थानीय जरूरतों को आगामी बजट में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।नरेश चौहान ने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और प्रशासन को जनता के और करीब लाना है। उन्होंने मुख्यमंत्री के दुर्गम क्षेत्रों में रात्रि प्रवास को सरकार और जनता के बीच सीधे संवाद की नई पहल बताते हुए कहा कि इससे जमीनी स्तर की समस्याओं को समझने और उनके समाधान की दिशा में तेजी से काम करने का अवसर मिल रहा है।
