अब सड़कों पर नहीं सिर्फ सोशल मीडिया पर ही होती है खिलाफत

मोहित प्रेम शर्मा, संपादक.

एक समय था जब भारत के जन आंदोलनों की गूंज संसद तक सुनाई देती थी।ये आंदोलन केवल नारों और झंडों तक सीमित नहीं थे,बल्कि कई जनविरोधी सरकारी नीतियों को पलटने की ताकत भी रखते थे।चाहे जयप्रकाश नारायण का संपूर्ण क्रांति आंदोलन हो,किसानों के हक की लड़ाई हो,या फिर महिलाओं के हक में निकली रैलियाँ या फिर युवाओं और छात्रों के मुद्दे,कई दफा इन वर्गों ने कई प्रदेशों और केंद्र की सत्ता को हिला कर रख दिया था।लेकिन आज,यही आंदोलन डिजिटल सीमाओं में ही सिमट कर रह गए हैं।

अब जनता की नाराजगी ट्वीट्स,इंस्टाग्राम पोस्ट्स और फेसबुक स्टोरीज़ में ही नजर आती है। लोग मान लेते हैं कि एक स्टेटस डालना,या हैशटैग ट्रेंड करवा देना ही पर्याप्त विरोध है।परंतु,वास्तविकता यह है कि इन डिजिटल विरोधों की उम्र अधिकतर 24 से 48 घंटे से ज्यादा नहीं होती। सरकारें जानती हैं कि यह विरोध आभासी है,अस्थायी है और बिखरा हुआ है।

क्या डिजिटल विरोध नाकाफी है?

बेशक,सोशल मीडिया एक सशक्त उपकरण है। यह सूचनाओं के प्रसार में क्रांति लेकर आया है और आवाज़ को सीमाओं के पार भी पहुंचाने की ताकत रखता है।लेकिन जब तक यह ज़मीनी सक्रियता से नहीं जुड़ता,तब तक यह सत्ता पर दबाव नहीं बना सकता।

आज सरकारें और यहां तक की ब्यूरोक्रेसी सोशल मीडिया के ट्रेंड्स को गंभीरता से नहीं लेतीं क्योंकि वे जानती हैं कि लोग दो दिन बाद किसी और मुद्दे पर ट्वीट करेंगे और पहले वाला मुद्दा दवा का दावा रह जाएगा और एक दिन गायब हो जाएगा।

जनभागीदारी में गिरावट के पीछे दो मुख्य कारण दिखाई देते हैं। पहला,अत्यधिक व्यस्तता जिसमें परिवार,रोज़गार,और निजी संघर्षों में उलझे लोग अब सार्वजनिक सरोकारों के लिए समय नहीं निकाल पाते।दूसरा,जीवन में निराशा और हताशा इस कदर हावी हो चुकी है कि अब इंसान सोचता है की अगर हम कुछ करें भी तो क्या फर्क पड़ जाएगा।यह सोच अब समझ में व्यापक हो चुकी है।यही विचारधारा आंदोलन की आत्मा को खोखला कर रही है।

मीडिया की भूमिका और सीमाएं :

मीडिया,जो कभी आंदोलनों की धड़कन हुआ करता था,अब राजनीतिक तमाशों और टीआरपी के पीछे भागता नजर आता है। जनहित के मुद्दों की कवरेज या तो सीमित होती है,या पूरी तरह नदारद।ऐसे में सोशल मीडिया एकमात्र विकल्प बन गया है,लेकिन वह भी वायरल कल्चर की भेंट चढ़ गया है। जहां असली मुद्दों से ज्यादा मीम्स और विवादों को तरजीह दी जाती है।

जन आंदोलन की राह बदलने पर विशेषज्ञ कुछ सुझाव भी देते हैं।इनका कहना है कि अब समय आ गया है कि जनता फिर से सक्रिय चेतना का परिचय दे।आप जनता को अपने क्षेत्र के प्रतिनिधियों द्वारा किए गए कामों को लेकर सवाल पूछते रहना जरूरी है।जनप्रतिनिधियों के लिए भी पंचायत स्तर से लेकर संसद तक जवाबदेही जरूरी होनी चाहिए।ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन मंचों पर भी जागरूकता होना बेहद जरूरी है।

एक लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता,बल्कि सक्रिय नागरिक भागीदारी से जीवित रहता है।यदि विरोध की भाषा सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित रह गई,तो सत्ता के गलत फैसले और भी बेलगाम हो जाएंगे।बहरहाल वह समय तो वापस नहीं आएगा जब अपनी आवाज बुलंद करने के लिए कोई भी किसी की भी खिलाफ आंदोलन का रास्ता अख्तियार करते हुए सड़कों पर खड़ा हो जाता था लेकिन आप लोगों ने अपने विरोध जताने का डिजिटल माध्यम से तरीका ढूंढ निकाला है।

Ekta TSN

rahulkash03@gmail.com http://www.thesummernews.in

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

करनाल पहुंचे बाबा रामदेव: बोले—वन नेशन, वन एजुकेशन और वन इलेक्शन जरूरी

राकेश कुमार शर्मा/करनाल-:करनाल पहुंचे योगगुरु बाबा रामदेव ने रविवार को शिक्षा व्यवस्था, भारतीय संस्कृति, चुनाव प्रणाली और देश में चल रहे विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। गुरुकुल में नए भवनों के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए बाबा रामदेव ने कहा कि देश को शिक्षा, चिकित्सा, भाषा और वैचारिक गुलामी से बाहर निकालने...

अनुराग ठाकुर का कांग्रेस पर तीखा हमला, बोले- ‘खटाखट’ नहीं, खटारा मॉडल देकर चले गए

राहुल चावला,धर्मशाला-:धर्मशाला के एक निजी होटल में भाजपा संगठनात्मक जिला कांगड़ा के पूर्व कर्मचारी प्रकोष्ठ का सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर सांसद अनुराग ठाकुर विशेष रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री सरवीन चौधरी, धर्मशाला के पूर्व विधायक विशाल नेहरिया, नगरोटा के पूर्व विधायक अरूण मेहरा सहित भाजपा...

वंदे मातरम् के सम्मान पर अडिग भाजपा, जयराम बोले- जरूरत पड़ी, तो हाईकोर्ट जाएंगे

शिमला,संजू-:राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के मुद्दे पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सियासी टकराव के बीच भाजपा विधायक दल ने रविवार को शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर कांग्रेस के खिलाफ जवाबी धरना दिया।नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने करीब डेढ़ घंटे तक चले धरने में...

त्योहारों से पहले महंगाई की मार, मिठाइयों के दाम बढ़ने की आशंका

अंबाला-त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही महंगाई ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाली चीनी, घी और ड्राई फ्रूट के दाम बढ़ने से मिठाई कारोबारियों की लागत बढ़ गई है। कारोबारियों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का सीधा असर अब...

पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की पहल, एमडब्ल्यूबी ने बांटी 10-10 लाख की बीमा पॉलिसियां

जगाधरी (यमुनानगर)-: पत्रकारों और उनके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में मीडिया वेलबीइंग एसोसिएशन (एमडब्ल्यूबी) की यमुनानगर जिला इकाई ने महत्वपूर्ण पहल की।शुक्रवार को मुख्य पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, जगाधरी में आयोजित कार्यक्रम में जिले के पत्रकारों को संगठन की ओर से निशुल्क 10-10 लाख रुपये की दुर्घटना बीमा पॉलिसियां...

NE

News Elementor

We bring you fast, clear, and credible news that cuts through the noise. From breaking headlines to stories that matter, count on us for smart, engaging coverage every day.

Stay informed. Stay curious. Stay with The Summer News.

Popular Categories

Must Read

Copyright © 2025 Summer News Network Pvt. Ltd.