राकेश कुमार शर्मा/करनाल-:करनाल में मानवता और साहस की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली, जहां बीएससी नर्सिंग की एक छात्रा ने सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई बुजुर्ग महिला को समय रहते सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देकर नई जिंदगी देने का प्रयास किया। हादसे के बाद जब आसपास मौजूद अधिकांश लोग सिर्फ घटना को देखते रह गए, तब नर्सिंग छात्रा सोनाक्षी राणा ने बिना समय गंवाए अपनी ट्रेनिंग का उपयोग करते हुए घायल महिला की मदद की। उनकी सूझबूझ और तत्परता की बदौलत महिला में फिर से जीवन के संकेत दिखाई दिए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग छात्रा की जमकर सराहना कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार करनाल के लाडो धाम के समीप एक सड़क दुर्घटना में कुरुक्षेत्र के ईशाकपुर गांव निवासी लगभग 65 वर्षीय रोशनी देवी गंभीर रूप से घायल हो गईं। बताया गया कि वह सड़क पार कर रही थीं, तभी हरियाणा रोडवेज की एक तेज रफ्तार बस ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि महिला कई फीट दूर जाकर गिरीं और कुछ समय के लिए उनकी सांसें रुक गईं। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। लोग इकट्ठा तो हो गए, लेकिन किसी को समझ नहीं आ रहा था कि घायल महिला की मदद कैसे की जाए।
इसी दौरान गांधी कॉलेज ऑफ नर्सिंग एंड फार्मेसी में बीएससी नर्सिंग द्वितीय वर्ष की छात्रा सोनाक्षी राणा अपने साथियों के साथ कॉलेज से घर लौट रही थीं। उन्होंने जैसे ही सड़क पर घायल महिला को देखा, तुरंत उनके पास पहुंचीं। सबसे पहले महिला की नब्ज और सांसों की जांच की। जब उन्हें लगा कि स्थिति बेहद गंभीर है, तो उन्होंने बिना किसी देरी के सीपीआर देना शुरू कर दिया। लगातार करीब दो मिनट तक सीने पर दबाव देकर और प्राथमिक उपचार की प्रक्रिया अपनाते हुए उन्होंने महिला की सांसें वापस लाने का प्रयास किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ ही देर बाद महिला के शरीर में हलचल दिखाई देने लगी और धीरे-धीरे उनकी सांसें लौटने लगीं। यह देखकर मौके पर मौजूद लोगों ने भी राहत की सांस ली। सोनाक्षी ने केवल प्राथमिक उपचार तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि आसपास मौजूद लोगों से तुरंत एंबुलेंस बुलाने की अपील भी करती रहीं।
जब काफी देर तक एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची, तब सोनाक्षी ने एक गुजरते वाहन को रुकवाया और घायल महिला को उसी वाहन से अस्पताल भेजने की व्यवस्था की। बताया गया कि अस्पताल पहुंचने तक भी उन्होंने महिला की स्थिति पर लगातार नजर रखी और आवश्यकतानुसार सीपीआर जारी रखा, ताकि उनकी सांसें सामान्य बनी रहें। उनकी इस संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता की हर कोई प्रशंसा कर रहा है।
सोनाक्षी राणा करनाल के राणा गांव की निवासी हैं और गांधी कॉलेज ऑफ नर्सिंग एंड फार्मेसी में बीएससी नर्सिंग द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। उनके पिता चनवा राम आर्म्ड फोर्स में देश की सेवा कर चुके हैं और वर्तमान में हरियाणा पुलिस के मधुबन परिसर में कार्यरत हैं। बेटी के इस साहसिक और मानवीय कार्य ने पूरे परिवार को गौरवान्वित कर दिया है।
घटना के बाद कॉलेज प्रबंधन ने भी सोनाक्षी राणा को सम्मानित किया। कॉलेज के शिक्षकों और प्रबंधन ने उनके साहस, सेवा भावना और प्रशिक्षण के उत्कृष्ट उपयोग की सराहना करते हुए उन्हें सम्मान स्वरूप मिठाई खिलाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। शिक्षकों ने कहा कि नर्सिंग शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी आपात स्थिति में लोगों की जान बचाने के लिए तत्पर रहना भी है। सोनाक्षी ने इस उद्देश्य को व्यवहार में साबित कर दिखाया।
सोनाक्षी ने बताया कि हादसे का दृश्य देखकर वह भी कुछ क्षणों के लिए घबरा गई थीं। उनके हाथ कांप रहे थे, लेकिन नर्सिंग की पढ़ाई के दौरान मिली ट्रेनिंग उन्हें तुरंत याद आ गई। उन्होंने बिना समय गंवाए महिला की नब्ज जांची और सीपीआर देना शुरू किया। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब महिला की सांसें पूरी तरह रुक चुकी थीं, लेकिन लगातार प्रयास के बाद उनमें फिर से जीवन के संकेत दिखाई देने लगे। उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपने कॉलेज के शिक्षकों और प्रशिक्षण को दिया, जिन्होंने उन्हें आपातकालीन परिस्थितियों में सही निर्णय लेना सिखाया।
सोनाक्षी के पिता चनवा राम ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर बेहद गर्व है। उन्होंने बताया कि जब वह आर्म्ड फोर्स में रहकर देश की सेवा करते थे, तब उन्हें अपने कर्तव्य पर गर्व होता था और आज बेटी को एक अनजान महिला की जान बचाने के लिए संघर्ष करते देखकर वही गर्व फिर से महसूस हुआ। उन्होंने कहा कि बेटियों को हर परिस्थिति में साहस और आत्मविश्वास के साथ आगे आना चाहिए तथा समाज के लोगों से भी अपील की कि सड़क हादसों में घायल लोगों की मदद करने से पीछे न हटें।
यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना की कहानी नहीं, बल्कि समय पर दी गई प्राथमिक चिकित्सा, सही प्रशिक्षण और मानवीय संवेदनाओं की ताकत का उदाहरण बन गई है। सोनाक्षी राणा ने यह साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में लिया गया सही निर्णय किसी की जिंदगी बचा सकता है। आज पूरे करनाल में उनके इस साहसिक कार्य की चर्चा हो रही है और लोग उन्हें वास्तविक अर्थों में मानवता की मिसाल बता रहे हैं।
