मीठा खाना भला किसे पसंद नहीं होगा। चाहे पुरुष हो या महिला… मीठा खाना हर किसी को अच्छा लगता है। कई लोग तो ऐसे होते हैं जिन्हें चाहे सुबह-शाम मीठा मिल जाए वह कभी खाने में बोर नहीं होते। अकसर लोग खाना खाने के बाद मीठा जरूर खाते हैं। हमारे भारत में तो पंजाबियों और हिन्दूओं को मीठा खाना काफी पसंद है। आज हम आपको ऐसी ही Recipe बताने जा रहे हैं। जो कि हिन्दू धर्म में Janmashtami व दिवाली जैसे त्योहारों पर बनाई जाती है। इसका बहुत ही महत्व है। Panchamrit का आनंद पूजा-अर्चना और धार्मिक अवसरों में भी उठाया जा सकता है। जन्माष्टमी के त्योहार पर लोग कई तरह के भोग लगाते हैं। इसमें माखन-मिश्री के साथ ही कन्हैया का अतिप्रिय भोग पंचामृत भी शामिल है।

ऐसे तैयार करें पंचामृत बनाने का बेहद आसान तरीका
पंचामृत पांच चीजों को मिलाकर तैयार किया जाता है। इसमें दूध, दही, घी, चीनी, शहद मिलाया जाता है।
पंचामृत बनाने के लिए सामग्री
दूध – 1 कप
दही – 1 कप
घी – 2 टी स्पन
शहद – 2 टेबलस्पून
चीनी – 2 टेबलस्पून
तुलसी पत्ते – 3-4

जानिए कैसे बनाएं पंचामृत
बता दें कि पंचामृत बनाना बेहद आसान है। आपको इसे बनाने के लिए सबसे पहले क्रीम वाला दही लें और इसे एक पतीली में डालकर घोल लें। फिर दही को अच्छी तरह से फेंट कर तैयार करें। ध्यान रखें कि दही ज्यादा न पतला हो न ही गाड़ा। इसके बाद दही में दूध डालें और उसे एक बड़ी करछी से अच्छी तरह से मिक्स कर दें। आप चाहें तो चिल्ड मिल्क का भी सेवन कर सकती हैं। दही-दूध के इस मिश्रण में 2 टेबलस्पून शहद और 2 स्पून चीनी डालें।

इसको घोलते रहे जब तक कि चीनी पंचामृत में मिक्स न हो जाए। अब यह बनकर तैयार हो गया है। खास बात का ध्यान रखें कि इस पंचामृत में आखिर में तुलसी के पत्ते तोड़कर डाल दें। इससे क्या होगा कि आपकी इस रेस्पी का स्वाद और बढ़ जाएगा। आप इसके ऊपर Dry Fruits का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाने के लिए उनका अतिप्रिय पंचामृत का भोग बनकर तैयार हो चुका है।

जानिए पंचामृत के लाभ
पंचामृत का सेवन करने से शरीर को रोगों से मुक्ति मिलती है। जिस तरह हम इससे भगवान को स्नान कराते हैं, ऐसा ही खुद स्नान करने से शरीर की कांति बढ़ती है। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। साथ ही चेहरे में निखार बना रहता है। पंचामृत से आप हाजमा औैर भूख न लगने की समस्या से मुक्ति पा सकते हैं। यह हमारी सेहत के लिए अमृत होता है।
ध्यान रखने वाली बातें
कहा जाता है कि पंचामृत बनाते समय उसे आप उसी दिन खत्म कर दें। दरअसल उन्हें अगले दिन के लिए न रखें। इसे आप प्रसाद के रुप में 1 या 3 चम्मच ही लें। यह हमेशा दाएं हाथ से ग्रहण करें।
What is the meaning of Panchamrit?
पंचामृत का अर्थ है पांच अमृत। गाय के दूध, दही, घी और शहद शक्कर को मिलाकर यह तैयार होता है। इसी से भगवान का अभिषेक किया जाता है।
पंचामृत कब पीना चाहिए?
ध्यान रखें कि हिंदू धर्म के अनुसार किसी भी पूजा के लिए पंचामृत या पंचामृतम एक अनिवार्य आवश्यकता है। यह देवताओं को दिया जाने वाला दिव्य प्रसाद है। यह अमृत के सामान होता है।
