शिमला,संजू-:प्रदेश में 1 जुलाई से लागू होने जा रही विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) योजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर योजना को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने और राजनीतिक कारणों से इसका विरोध करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार योजना के वास्तविक प्रावधानों को नजरअंदाज कर झूठे दावे कर रही है, जिससे प्रदेश के हित प्रभावित हो सकते हैं।
शिमला से जारी बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाई गई वीबी-जी राम जी योजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण आजीविका को अधिक सशक्त, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। उनके अनुसार योजना में सरकार की जवाबदेही तय करने, रोजगार प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने, समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने तथा रोजगार के अवसरों का विस्तार करने जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सुधारों से भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी, जिससे राज्य सरकार असहज महसूस कर रही है।नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नई योजना के तहत रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिनों तक की गई है। उन्होंने दावा किया कि जो भी व्यक्ति काम करने का इच्छुक होगा, उसे रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था कानून में की गई है। इसके साथ ही रोजगार प्राप्त करने की पात्रता का आधार केवल काम करने की इच्छा को बनाया गया है, जिससे अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सकेगा।उन्होंने बताया कि पहले निर्माण कार्यों की लागत का 75 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार वहन करती थी, जिसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत कर दिया गया है। उनके अनुसार हिमाचल प्रदेश सहित अन्य पर्वतीय राज्यों को इससे अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यस्थल पर दुर्घटना की स्थिति में श्रमिकों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का लाभ मिलेगा। यदि मजदूरी का भुगतान 15 दिनों के भीतर नहीं किया जाता है तो ब्याज सहित भुगतान करने का प्रावधान भी योजना में रखा गया है। साथ ही रोजगार उपलब्ध न होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने की व्यवस्था भी शामिल की गई है।
जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार द्वारा यह कहे जाने पर भी सवाल उठाया कि नई योजना के कारण मजदूरी कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि वीबी-जी राम जी अधिनियम की धारा 10 में स्पष्ट उल्लेख है कि केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित मानदेय किसी भी स्थिति में मनरेगा की मजदूरी से कम नहीं होगा। इसलिए सरकार द्वारा मजदूरी घटने का दावा पूरी तरह निराधार और भ्रामक है।
उन्होंने कहा कि योजना में आपदा राहत और आपदा न्यूनीकरण से जुड़े कार्यों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। हिमाचल प्रदेश जैसे आपदा प्रभावित राज्य के लिए यह व्यवस्था पुनर्वास, राहत और आपदा प्रबंधन के कार्यों में काफी उपयोगी साबित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम करने के बजाय केवल राजनीतिक विरोध में समय व्यतीत कर रही है।पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वीबी-जी राम जी योजना विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई है और इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ-साथ आजीविका को भी मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि योजना भ्रष्टाचार पर रोक लगाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग, कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने तथा समय पर भुगतान सुनिश्चित करने जैसे कई सुधारात्मक प्रावधान लेकर आई है। ऐसे में केवल राजनीतिक मतभेद के कारण इसका विरोध करना प्रदेश के विकास के हित में नहीं है।उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि 1 जुलाई से योजना लागू होने के बाद उसका अधिकतम लाभ प्रदेश के लोगों तक पहुंचाने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाए। जयराम ठाकुर ने कहा कि यदि योजना का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया जाए तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और आधारभूत विकास को नई गति मिल सकती है।
