शिमला,संजू-:हिमाचल प्रदेश की सियासत में भाजपा की लोकतंत्र बचाओ रैली और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयानों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है।मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भाजपा पर पलटवार करते हुए पार्टी में गुटबाजी होने का आरोप लगाया है।उन्होंने दावा किया कि प्रदेश भाजपा पांच अलग-अलग गुटों में बंटी हुई है और इन गुटों को एकजुट करने के मकसद से ही असम के मुख्यमंत्री को हिमाचल प्रदेश बुलाना पड़ा है।सुक्खू ने यह भी विश्वास जताया कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में वापसी करेगी।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी,जिसमें उन्होंने हिमाचल में अगले शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने की बात कही थी।इस पर तंज कसते हुए सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में जब अगली बार कांग्रेस की सरकार बनेगी,तब शपथ ग्रहण समारोह में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया जाएगा।असम के मुख्यमंत्री को भी बाकायदा निमंत्रण भेजा जाएगा।उन्होंने कहा कि कांग्रेस की दोबारा सरकार बनना तय है।साथ ही उन्होंने भाजपा के 16 विधायकों की चुनावी जीत पर भी सवाल उठाए।मुख्यमंत्री के मुताबिक,भाजपा के ये विधायक फिलहाल ऐसी स्थिति में नहीं हैं कि आगामी चुनाव में दोबारा जीत हासिल कर सकें। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम आने पर उनके दावे की सच्चाई सामने आ जाएगी।
ईवीएम को लेकर जारी राजनीतिक बहस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे को समझने के लिए घटनाक्रम और समयक्रम पर गौर करना जरूरी है।उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव ईवीएम के माध्यम से करवाए गए थे,जबकि मशीनों को लेकर सवाल वर्ष 2024 के बाद उठने शुरू हुए।ऐसे में इस पूरे मामले को तथ्यों के आधार पर समझने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर तथ्यों के साथ चर्चा होनी चाहिए।प्रदेश की आर्थिक स्थिति और सरकार की व्यवस्था परिवर्तन नीति पर बोलते हुए सुक्खू ने कहा कि उनकी सरकार हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों से प्रदेश को मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान यानी आरडीजी बंद होने से राज्य के सामने आर्थिक चुनौतियां खड़ी हुई हैं।इसके बावजूद सरकार ने वित्तीय प्रबंधन के जरिए परिस्थितियों को संभालने का प्रयास किया है।मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आरडीजी में लगभग 8 से 10 हजार करोड़ रुपये की कमी आने के बावजूद प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था को पटरी पर बनाए रखना सरकार की बड़ी उपलब्धि है।
मुख्यमंत्री ने हिमाचल के प्राकृतिक और आर्थिक संसाधनों के संरक्षण को सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यहां उपलब्ध संपदा का उचित इस्तेमाल करना जरूरी है।सरकार हिमाचल के संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।सुक्खू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश की संपदा को न तो लुटने दिया जा रहा है और न ही भविष्य में ऐसा होने दिया जाएगा।सरकार हिमाचल के हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयासरत है।
दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस और विपक्षी दलों की रैली पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की जिम्मेदारी जनता की आवाज उठाना है। रैलियां और आंदोलन लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं।उन्होंने कहा कि दिल्ली में आयोजित रैली में लाखों लोग शामिल हुए,जो लोकतंत्र और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों के प्रति लोगों की गंभीरता को दर्शाता है।सुक्खू ने आरोप लगाया कि एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के माध्यम से कथित तौर पर धांधली की जा रही है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी इन मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।मुख्यमंत्री के अनुसार,दिल्ली की रैली में हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और लोगों ने भाग लिया।
