दिल्ली (एकता): कहते हैं कि अपने शौक को अपना Passion बनाना चाहिए। अगर कोई ऐसा करता है तो वह जीवन में सफलता की बुलंदियों को छूता हैं। किसी को घूमने का शौक, शॉपिंग, किसी चीज़ को अलग करके दिखाने का शौक होता है। लेकिन बहुत कम लोग ही अपनी हॉबी को पूरा करते हैं। आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताएंगे जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। दरअसल जिस उम्र में लोग घर बैठकर आराम करते हैं, उस उम्र में दिल्ली के रहने वाले Turban Traveler नाम से मशहूर अमरजीत सिंह चावला 87 देशों की सैर कर चुके हैं। इनमें से 47 देशों की सैर तो वह अपनी गाड़ी से ही कर चुके हैं।

उन्होंने अपनी Fortuner गाड़ी में काफी सफर किया है। उनकी गाड़ी की एक झलक सबको अपना दीवाना बना देती है। वह इतने देशों में यात्रा कर चुके हैं कि उनकी गाड़ी और वह काफी मशहूर हो गए हैं। लोग अब तो उन्हें दूर से ही देखकर पहचान जाते हैं। खास बात यह है कि इस बार वह अपनी पत्नी को भी एक खास वर्ल्ड टूर पर लेकर जा रहे हैं। इससे पहले उन्होंने आनंदपुर साहिब में माथा टेका और फिर से विदेश के सफर पर निकल गए।

इनका लक्ष्य 7 के 7 महाद्वीपों में घूमना है। वह सफर में अपने साथ कपड़े और खाने का सामान लेकर चलते हैं। क्योंकि वह शाकाहारी हैं, इसलिए इन्हें भोजन की दिक्कत होती है। वह अलग-अलग 7 के 7 महाद्वीप में जाकर भारत का झंडा फहराएंगे।

मीडिया सूत्रों के अनुसार अमर जीत सिंह चावला पेशे से एक कपड़े के व्यापारी हैं। उन्होंने अपनी हॉबी को ही Passion बना लिया। आज वह दुनियाभर में इतने मशहूर हैं कि उन्हें हर कोई जानता है। आपको बता दें कि Turban Traveler अकसर काम के सिलसिले में इधर-उधर विदेश या कहीं और जाते थे तो उन्हें लगता था कि यह जिंदगी काफी अच्छी है। बस फिर क्या…इन्होंने अपना बिजनेस अपने बेटे को थमाया और उसके बाद अपनी गाड़ी में ही टूर पर निकल गए।

63 साल के अमरजीत सिंह ने 2018 में अपनी गाड़ी पर विदेश के टूर के प्लान बनाए और वो दिल्ली से लंदन निकल पड़े। वह अब तक 40 हजार से ज्यादा किलोमीटर कवर कर चुके हैं। खास बात यह है कि वह 30 देशों को पार करके वहां पर पहुंचे। रूस, एस्टोनिया, लातविया, फिनलैंड, स्वीडन, नॉर्वे, डेनमार्क , नेपाल, चीन, तिब्बत, कार्गिस्तान, उज़्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, जर्मनी, नीदरलैंड, बेल्जियम, चेक रिपब्लिक , हंगरी, पोलैंड, स्लोवेनिया, स्लोवाकिया, स्विजरलैंड, इटली, स्पेन, पुर्तगाल, फ्रांस और लंदन पहुंचे। इन्होंने ये यात्रा 7 जनवरी 2019 को पूरी कर ली थी। इतना ही नहीं वह अपनी यात्रा को ऐसे ही बरकरार रखना चाहते हैं।

