शिमला-:चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र के होली में युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रमणि कुलेठी की करंट लगने से हुई आकस्मिक मौत से कांग्रेस परिवार में शोक की लहर है।युवा कांग्रेस के एक सक्रिय और समर्पित पदाधिकारी के असमय निधन से पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरा दुख है।घटना की सूचना मिलने के बाद मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने होली क्षेत्र में प्रस्तावित अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं।मुख्यमंत्री शोक संतप्त परिवार से मिलने और चंद्रमणि कुलेठी की अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए होली पहुंचेंगे।
मुख्यमंत्री के मीडिया एडवाइजर नरेश चौहान ने चंद्रमणि कुलेठी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।उन्होंने कहा कि चंद्रमणि पार्टी के कर्मठ,सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ता थे।वह पिछले सात से दस वर्षों से उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते थे।चंद्रमणि ने एनएसयूआई से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और युवा कांग्रेस तक संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी।नरेश चौहान ने कहा कि चंद्रमणि कुलेठी की असमय मृत्यु से कांग्रेस संगठन और पूरे क्षेत्र को अपूरणीय क्षति पहुंची है।उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।उन्होंने बताया कि चंद्रमणि का एक छोटा बेटा है, जिसकी उम्र करीब डेढ़ से दो वर्ष है।वहीं,उनके माता-पिता भी बुजुर्ग हैं और बीमार रहते हैं।ऐसे में परिवार के लिए यह मुश्किल घड़ी बेहद पीड़ादायक है।उन्होंने बताया कि होली क्षेत्र में मुख्यमंत्री का ‘सरकार गांव के द्वार’कार्यक्रम प्रस्तावित था।मुख्यमंत्री का रात्रि ठहराव भी होली में होना था। कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र के लोगों में उत्साह था और तैयारियां जोरों पर चल रही थीं।पार्टी कार्यकर्ता और प्रशासन आयोजन को सफल बनाने में जुटे हुए थे।
नरेश चौहान के अनुसार,चंद्रमणि कुलेठी पिछले कई दिनों से कार्यक्रम की तैयारियों में लगातार सक्रिय थे। वह प्रशासन और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाकर व्यवस्थाएं संभाल रहे थे।कार्यक्रम स्थल पर झंडे लगाने,प्रचार सामग्री तैयार करने और अन्य इंतजामों में भी उनकी अहम भूमिका थी।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सुबह उनसे व्यक्तिगत बातचीत कर घटना पर गहरा दुख जताया।मुख्यमंत्री भी इस दुखद समाचार से बेहद आहत हैं।मुख्यमंत्री के कार्यक्रम रद्द करने और अंतिम संस्कार में शामिल होने के फैसले को दिवंगत कार्यकर्ता के प्रति संवेदना और सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
