करनाल, 3 सितंबर : पेरिस में चल रहे पैरालंपिक खेलों में भारत ने बैडमिंटन में एक और इतिहास रच दिया है। करनाल के बैडमिंटन कोच नितेश कुमार ने देश के लिए गोल्ड जीता है। इस जीत के बाद करनाल कर्ण स्टेडियम में खुशी का माहौल है और बच्चों ने एक दूसरे को लड्डू खिला कर खुशी मनाई। उनका कहना है कि नितेश सर आएंगे तो उनका जोरदार स्वागत किया जाएगा।
हरियाणा के नितेश कुमार जो चरखी दादरी के नांदा गांव से ताल्लुक रखते है। उन्होंने आज पैरा बैडमिंटन पेरिस पैरालंपिक के पुरुष एकल एसएल3 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। फाइनल मुकाबले में उन्होंने ग्रेट ब्रिटेन के डेनियल बेथेल को 21-14, 18-21, 23-21 के स्कोर से मात दी। इस जीत ने नितेश की कठिनाइयों और संघर्षों से भरी यात्रा को एक शानदार अंत दिया है।
ट्रेन हा*दसे में एक पैर खोया
2009 में जब नितेश केवल 15 साल के थे, विशाखापत्तनम में एक ट्रेन हा*दसे ने उनकी जिंदगी को हिला कर रख दिया। इस हादसे में नितेश ने अपना एक पैर खो दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। यह वही समय था जब उन्होंने अपने सपनों को नया आकार देने का फैसला किया। महीनों तक बिस्तर पर रहने के बाद, नितेश ने खेल को अपने जीवन का नया मकसद बना लिया और बैडमिंटन को अपनी शक्ति का स्रोत बनाया।नितेश ने अपनी पढ़ाई आईआईटी मंडी से बीटेक में की, लेकिन उनकी असली पहचान बैडमिंटन में मिली। पढ़ाई के दौरान बैडमिंटन के प्रति उनकी रुचि बढ़ी और उन्होंने इसे ही अपने करियर का हिस्सा बना लिया।
कर्ण स्टेडियम में कोच के रूप में सेवा दे रहे
वर्तमान में, नितेश करनाल के कर्ण स्टेडियम में कोच के रूप में सेवा दे रहे हैं, जहां वह युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। नितेश परिजनों का मानना है कि खेल ने ही उसे जीवन में नई दिशा दी।
खेल विभाग के उपनिदेशक राकेश पांडे का कहना ये
खेल विभाग के उपनिदेशक राकेश पांडे ने कहा कि नितेश की खेल उपलब्धियों की सूची लंबी है। उन्होंने 2018 में एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीता, 2019 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किया, और 2022 और 2024 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीते। पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण पदक उनकी अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है, जिसने उन्हें एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है।
खुद को साबित कर दिखाया
कोच राजेश कुमार ने कहा कि आज हमारे लिए एक बड़ा गर्व का विषय है। हम इस एक त्यौहार के रूप में इसे मना रहे हैं। नितेश ने 45 वर्ष की आयु में बैडमिंटन सीखना शुरू किया और एक कड़े मुकाबले को जीतकर उन्होंने खुद को साबित कर दिखाया है। नितेश के पिता, जो पहले नौसेना में थे और अब राजस्थान में एक निजी कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं, हमेशा से नितेश के प्रेरणा स्रोत रहे हैं। नितेश का सपना था कि वह भी अपने पिता की तरह वर्दी पहनें, लेकिन हादसे के बाद उन्होंने खेल को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया। उनके कोच और परिवार ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
करनाल के कर्ण स्टेडियम में बैडमिंटन के खिलाड़ियों का कहना है कि नितेश सर आएंगे पार्टी होगी। सर ने हमें भी एक राह दिखाई है और हमें अपने बच्चों की तरह प्रैक्टिस करवाते थे। नितेश की यह जीत न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
