मंडी, धर्मवीर ( TSN)-आज के दौर में हम बात करें की नौकरी करने वाला व्यक्ति ज्यादा सफल होता है या अपना व्यवसाय शुरू कर उसे बुलदियों पर ले जाना वाला, तो 90 प्रतिशत लागों का जवाब होगा अपना व्यवसाय शुरू करने वाला। ऐसा जवाब लोगों का इसलिए होगा क्योंकि हम अपने आस-पास देखते हैं कि 30-35 साल नौकरी करने वाला व्यक्ति उतना कभी भी नहीं कमा पाता है, जितना एक व्यावसायी इससे भी आधे समय में ही कमा लेता है। यही कारण है कि आज भारत के युवाओं की सोच उद्यामिता की ओर बढ़ी है। भारत के युवा अब अपनी कॉलेज व स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही नौकरी ढंढने के बजाय सोचना शुरू कर चुकें है। इसका खुलासा गेस ग्लोबल रिसर्च प्रोजेक्ट के सर्वेक्षण में हुआ है। भारतीय छात्र उद्यमिता पर अपनी तरह का यह पहला सर्वेक्षण है, जिसे इंडिया चौप्टर द्वारा लाया गया है। इस सर्वे की लांचिग हैदराबाद में की गई।
32.5 प्रतिशत छात्र पहले से ही नए उद्यमी:
सर्वेक्षण के अनुसार भारतीय कॉलेज के 32.5 प्रतिशत छात्र पहले से ही नए उद्यमी हैं। यह अपना व्यवसाय शुरू करने में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं। यह आंकड़ा वैश्विक औसत 25.7 प्रतिशत से काफी अधिक है। वैश्विक विश्वविद्यालय उद्यमशीलता भावना छात्र सर्वेक्षण (गेस) में सामने आया है कि 14 प्रतिशत भारतीय छात्र स्नातक होने के तुरंत बाद संस्थापक बनने की योजना बनाते हैं, जो वैश्विक औसत 15.7 प्रतिशत के करीब है। 31.4 प्रतिशत छात्र स्नातक होने के पांच साल बाद उद्यमिता को आगे बढ़ाने का इरादा रखते हैं। जबकि वैश्विक औसत 30 प्रतिशत है। इस सर्वेक्षण में नवंबर 2023 से फरवरी 2024 के दौरान किए गए इस सर्वेक्षण में भारत भर के सैकड़ों उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकित 13,896 छात्रों के जवाब प्राप्त हुए। जबकि विश्व स्तर पर 57 देशों के 2.67 लाख छात्रों के जवाब मिले हैं। इस रिपोर्ट का नेतृत्व भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी (आईआईटी मंडी) के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर और गेस इंडिया के कंट्री डेलीगेट डॉ. पूरन सिंह ने किया। इसके सह-लेखक आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के राष्ट्रीय टीम सदस्य और डॉक्टरेट उम्मीदवार धर्मेंद्र के यादव हैं। इस सर्वेक्षण भारतीय छात्रों की उद्यमशीलता संबंधी महत्वाकांक्षाओं और कार्यों के बारे में विस्तृत जानकारी है।
रिपोर्ट की मुख्य बातेंः
बदलती करिअर आकांक्षाएंः 69.7 प्रतिशत छात्र स्नातक होने के बाद रोजगार की तलाश करते हैं। यह आंकड़ा पांच वर्षों में घटकर 52.2 प्रतिशत रह जाता है। इस अवधि के दौरान 31 प्रतिशत छात्र उद्यमी बनने की आकांक्षा रखते हैं। जबकि स्नातक होने पर यह आंकड़ा 14 प्रतिशत था।
मजबूत उद्यम पाइपलाइन: 38 प्रतिशत छात्र उद्यम निर्माण में शामिल हैं। जिनमें से 33 प्रतिशत अभी शुरुआती चरण में हैं, जो वैश्विक समकक्षों में सबसे अधिक है। केवल 4.8 प्रतिशत ही राजस्व सृजन चरण तक पहुंच पाए हैं।
विश्वविद्यालय समर्थन: वर्तमान में 63 प्रतिशत छात्र उद्यमी विश्वविद्यालय सहायता प्राप्त करते हैं। 26 प्रतिशत छात्र उद्यम इनक्यूबेट किए जाते हैं।
भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश:
रिपोर्ट के मुख्य लेखक और आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पूरन सिंह ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी भारत में है। अभी तक हमारे छात्रों की उद्यमशीलता की मानसिकता को समझने के लिए कभी कोई डेटा नहीं था। गेस इंडिया 2023 रिपोर्ट इस डेटा को सामने लाकर भारत के छात्र उद्यमिता परिदृश्य के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण को चिह्नित किया है। कहा कि सर्वे में सामने आया है कि कॉलेज छात्र नौकरी ढूंढने के बजाए नौकरी देने वाला बनना चाहता है। वहीं, आईएसबीए के अध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार ने कहा कि गेस इंडिया 2023 रिपोर्ट भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम हितधारकों के लिए महत्वपूर्ण महत्व रखती है। रिपोर्ट में दी गई जानकारी भारत के छात्र उद्यमिता वातावरण की अंतर्निहित ताकत और कमजोरियों को उजागर करती है। यह छात्र-नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने और बढ़ाने के लिए एक रोडमैप पेश करती है।
