भावना,हिसार (TSN): शिक्षा व साहित्य के क्षेत्र में इंटरनेशनल स्तर पर अपनी पहचान बन चुके गांव कुलाना निवासी प्रोफेसर डॉ. संदीप कुमार सिंहमार को अब ‘द यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन’ (यूनेस्को) हैडक्वाटर पेरिस में आयोजित होने वाले सम्मान समारोह में ग्लोबल टीचर अवार्ड-2023 से सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा वह यूनेस्को हेड क्वार्टर में ही आयोजित होने वाली इंटरनेशनल कांफ्रेंस में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हुए ‘विश्व शांति चाहिए, युद्ध नहीं’ विषय पर अपना शोध पत्र भी प्रस्तुत करेंगे।
डॉ. संदीप ऐसे पहले भारतीय शिक्षाविद व साहित्यिक बन गए है, जिन्हें डायरेक्ट यूनेस्को की ओर से सम्मानित किया जा रहा हैं। डॉ. सिंहमार को परंबलुरु में आयोजित इंटरनेशनल कांफ्रेंस में उच्चतर शिक्षा में सराहनीय योगदान को देखते हुए यूनेस्को व यूएनओ से प्रमाणित संस्था अमेरिकन रिसर्च काउंसिल से भी इंटरनेशनल अवॉर्ड मिल चुका हैं। शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय भूमिका निभाने वाले शिक्षकों एवं शोधार्थियों को यह पुरस्कार प्रदान किया जाता हैं।
एन.आई.आई.एल.एम. विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर एवं हिंदी विभागाध्यक्ष के तौर पर कार्यरत डॉ संदीप कुमार सिंहमार को ग्लोबल टीचर अवॉर्ड-2023 के लिए चयन होने पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ.शमीम अहमद व कुलसचिव डॉ.राजीव दहिया,चेयरमैन संदीप चहल,निदेशक डॉ. बलराज ढांडा व संदीप कुमार चहल ने खुशी जताते हुए बधाई दी। कुलपति प्रोफेसर डॉ. शमीम अहमद ने कहा कि इस तरह के अवॉर्ड मिलने से जहां अन्य प्राध्यापकों को प्रेरणा मिलती हैं, वहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय का गौरव भी बढ़ा हैं।
बता दें कि डॉ.संदीप कुमार सिंहमार इंटरनेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग के चेयरमैन होने के साथ-साथ एन.आई.आई.एल.एम विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। डॉ. सिंहमार 400 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हुए शोधपत्र प्रस्तुत कर चुके हैं। इसके अलावा 150 से अधिक शोध पत्र विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। स्वतंत्र लेखक व टिप्पणीकार के तौर पर भी उनके अब तक 1027 लेख/स्तंभ लेख व टिप्पणी विभिन्न समाचार पत्रों व संपादित पुस्तकों में प्रकाशित हो चुके हैं। वर्तमान में डॉ. सिंहमार सामरिक विषयों सहित समसामयिक मुद्दों पर अपने लेख लिखते रहते हैं। इन्हीं लेखों व उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान के आधार पर अब उन्हें सम्मान मिल रहा हैं।
