/ Oct 05, 2026

भारत में जानिए क्यों बैन है दुनिया की सबसे महंगी शॉल… वजह कर देगी हैरान

दिल्ली (एकता): पश्मीना शॉल न सिर्फ भारत में मशहूर है, बल्कि विदेशों में भी लोग इसे काफी पसंद करते हैं। जब कोई अच्छे शॉल की बात करते हैं तो हर किसी के मुंह पर सिर्फ पश्मीना का ही नाम आता है। यह बेहद खूबसूरत, मुलायम और गर्म भी होती है, जिसकी वजह से इसके दुनियाभर में लोग दीवाने भी हैं। इस शॉल की कीमत लाखों में होती है। वहीं दूसरी तरफ पश्मीना के अलावा आपने कभी शहतूश शॉल का नाम सुना है…यह भी दुनिया की सबसे महंगी शॉल है। जिसकी कीमत लाखों रुपए में हैं लेकिन आप ये शॉल भारत में नहीं खरीद सकते। क्योंकि यह भारत में बैन है। लेकिन इसके बनाने की प्रोसेस ऐसी है कि इसे अब भारत में बैन कर दिया गया है।


जानिए क्यों खास है शहतूश शॉल?

शहतूश शॉल की बात ही कुछ और है। खास बात यह है कि ये शॉल जान+वरों के बालों से तैयार की जाती है। इस शॉल को तैयार करना इतना आसान है। क्योंकि इसको तैयार करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। क्योंकि जिन जान#वरों से ये शॉल तैयार की जाती है वह बर्फीले पहाड़ जैसे तिब्बत और लद्दाख रिजन में पाए जाते हैं। इन चिरु के बालों से इसको बनाया जाता है। ये काफी गर्म भी होती है।


शॉल के महंगे होने के पीछे क्या है कारण?

पहली बात तो यह है कि ये किसी जानवर के बाल से तैयार की जाती है। जिसकी वजह से ये काफी महंगी भी होती है। चिरु काफी दुर्लभ जान#वर हैं और उनके बालों को इकट्ठा करना काफी कठिन होता है। कहते हैं कि एक शॉल बनाने के लिए 4-5 चिरू के बालों का इस्तेमाल होता है, जिस वजह से यह काफी महंगी भी होती है।

भारत में बैन क्यों है शहतूश?

भारत में इस शॉल को बैन करने के पीछे खास वजह है। दरअसल इसकी यहां बनाने की प्रक्रिया ठीक नहीं थी। क्योंकि एक शॉल को बनाने के लिए हर साल 4-5 चिरु की मौ+त होती थी। जिससे इसे दुर्लभ जान@वर माना जाने लगा। मौ#तों की वजह से इसको भारत में बैन कर दिया गया। गौरतलब है कि साल 1975 में IUCN द्वारा शहतूश शॉल को बैन कर दिया गया। अब इसकी बिक्री नहीं होती है। शॉल की रेट की बात करें तो ये 5000 डॉलर से लेकर 20 हजार डॉलर में भी बिकता था। इसे खरीदने के लिए आपको 10-15 लाख रुपए तक भी खर्च करने पड़ सकते हैं।

दुनिया का सबसे महंगा शॉल कौन सा है?

तिब्बती पठार पर जान$वरों के रगड़ने के लिए कोई झाड़ियां या पेड़ नहीं हैं। फर इकट्ठा करने के लिए मृ%ग को मारना पड़ता है। एक शॉल बनाने में चार या पांच चिरू लगते हैं। कच्चे माल की कमी के कारण ये शॉल महंगे होते हैं।

Ekta TSN

rahulkash03@gmail.com http://www.thesummernews.in

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