शिमला, 16 अप्रैल -:पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-105) के निर्माण में देरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा सांसद सुरेश कश्यप ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते यह अहम परियोजना ठप पड़ गई है।
कश्यप ने कहा कि प्रदेश सरकार समय पर भूमि उपलब्ध करवाने में विफल रही, जिसके कारण निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। भूमि अधिग्रहण में देरी, आवश्यक अनुमतियों का लंबित रहना और विभागों के बीच तालमेल की कमी को उन्होंने मुख्य कारण बताया। मार्च 2025 तक भी भूमि का पूरा हस्तांतरण नहीं हो सका।उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा में खनन अनुमति मिलने में देरी, हाई वोल्टेज बिजली लाइनों के शिफ्टिंग में बाधा और 2023 की भारी बारिश ने परियोजना को प्रभावित किया, लेकिन सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की ही है।
सांसद के अनुसार केंद्र सरकार इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय है। नई टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और सड़क के रखरखाव के लिए एजेंसियां तैनात की गई हैं। लगभग 30.3 किलोमीटर लंबे इस राष्ट्रीय राजमार्ग का 17 किलोमीटर हिस्सा हिमाचल में आता है, जो औद्योगिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार केवल श्रेय लेने की राजनीति कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर विकास कार्य ठप पड़े हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी।
इधर, राज्य में पंचायत चुनावों को लेकर भी तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी खर्च पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश जारी किए हैं। जिला परिषद उम्मीदवारों को अपने चुनावी खर्च का पूरा ब्योरा निर्धारित प्रारूप में देना होगा और नामांकन के समय अलग बैंक खाता खोलना अनिवार्य होगा। इसी खाते के माध्यम से सभी लेन-देन किए जाएंगे, जिनकी निगरानी प्रेक्षक करेंगे।हालांकि बीडीसी सदस्य और ग्राम पंचायत प्रधान पद के लिए खर्च सीमा तय नहीं की गई है, जिसको लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आयोग का तर्क है कि ये चुनाव स्थानीय स्तर के होते हैं और खर्च क्षेत्र के अनुसार बदल सकता है।शहरी निकाय चुनावों के लिए भी खर्च सीमा निर्धारित की गई है। नगर निगम पार्षद उम्मीदवार अधिकतम 1 लाख रुपये, नगर परिषद उम्मीदवार 75 हजार रुपये और नगर पंचायत उम्मीदवार 50 हजार रुपये तक खर्च कर सकेंगे।राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है।
