दिल्ली (एकता): हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। विश्व विख्यात शक्तिपीठ मां चिंतपूर्णी के मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जो अपनी श्रद्धा से दान, सोना और चांदी का चढ़ावा चढ़ाते हैं। चिंतपूर्णी लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। कई श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर पैदल यात्रा कर मां के दरबार में आते हैं। ऐसा ही कुछ दिल्ली के श्रद्धालु दविंदर भल्ला ने किया। सूत्रों के मुताबिक श्रद्धालु ने मां चिंतपूर्णी के दरबार में मनोकामना पूरी होने पर 35 किलो चांदी का छत्र चढ़ाया। खास बात यह है कि बाजार में इस छत्र की कीमत 30 से 32 लाख रुपए बताई जा रही है। दविंदर भल्ला ने बुधवार को मां के दरबार में हाजिरी लगाई।

चिंतपूर्णी मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
मान्यता है कि चिंतपूर्णी में माता सती के चरण गिरे थे और इस प्रकार इसे 51 शक्तिपीठों में से सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। चिंतपूर्णी में निवास करने वाली देवी को छिन्नमस्तिका के नाम से भी जाना जाता है।

चिंतपूर्णी माता का इतिहास क्या है?
चिन्तपूर्णी को चिन्ता को दूर करने वाली देवी जिसे छिन्नमस्तिका भी कहा जाता है। छिन्नमस्तिका का अर्थ है-एक देवी जो बिना सर के है। कहा जाता है कि यहां पर पार्वती के पवित्र पांव गि+रे थे। चिंतपूर्णी का मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है।
