दिल्ली (एकता): दुनियाभर में सैकड़ों साल पुरानी इमारतें तो आपने देखी ही होगी, क्या आपने कभी यह सोचा है कि यह ज्यादा सालों तक क्यों टिकी रहती हैं। इसमें कोई बदलाव नहीं आता। चाहे ये इमारतें पुरानी ही क्यों न हो जाए। ये काफी टाइम तक वैसी की वैसी ही रहती हैं। कई बार राज्यों में भूकंप आते हैं, लेकिन ये खड़ी ही रहती हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इन इमारतों का निर्माण Special प्रकार के रासायनिक मिश्रणों का उपयोग करके किया गया था, जो कि उन्हें मजबूत बनाते थे। आजकल की इमारतों में तो इतनी जान ही नहीं होती है। पहले जमाने में तो रोमन साम्राज्य में जले हुए चूना पत्थर और ज्वाला+मुखी की रा#ख की मिलावट के निर्माण में इस्तेमाल होता था। जिससे इमारतें और मजबूत हो जाती थी।

जानें क्या है इतिहास से कनेक्शन
बता दें कि मंदिर और इमारतें भी अपने विशेष निर्माण Technologies के लिए काफी मशहूर हैं। इन इमारतों के निर्माण में भी विशेष रासायनिक प्रतिक्रियाएं और सामग्री का इस्तेमाल होता था। पुरानी इमारतों की अच्छे से देखभाल की जा रही है। जिससे दीवारें और संरचनाएं खड़ी रहती हैं। जिससे ये और सुरक्षित बनती है।

इस तरीके से बनाई जाती थी इमारतें
वैसे तो आज तक कोई भी इसका इतिहास नहीं जान पाया कि ये इमारतें इतने समय तक कैसे टिकी रहती हैं। वैज्ञानिकों ने खोजा कि इन इमारतों के निर्माण में कई पदार्थों का महत्वपूर्ण रोल था। इन पेड़ों की छाल और उनके रस को इनमें प्रयोग किया जाता था, जो रसायनिक और भौतिक रूप से मजबूत होता था। इसी कारण से ये इतने समय तक वैसी की वैसी ही रहती हैं। प्राचीन भारत की इमारतें भी सुर्खियों में रहती हैं। इसमें जड़ी बूटियों का इस्तेमाल किया जाता था। जिससे भूकंप से आने वाले नुकसान को कम किया जाता था।

