9 जनवरी,सोनीपत : हिम्मत करने वालों की कभी हार नहीं होती,सोनीपत से ऐसा ही एक मामला सामने आया है। एक महिला ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (DSSSB) की पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT) भर्ती के लिए आवेदन किया, लेकिन कुछ कारणों से उनकी नियुक्ति रोक दी गई, जिसके बाद उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी. आखिरकार 12 साल बाद उनके पक्ष में फैसला आया है। जिसके बाद महिला की खुशी का ठिकाना नहीं रहा है।
बता दे 12 साल पहले ,दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (DSSSB) की पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT) के पदों पर भर्तियां निकाली थीं। ये भर्तियां दिसंबर 2011 में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में टीचर्स के लिए निकाली गई थी। इसके लिए सोनीपत, हरियाणा की शबाना परवीन ने भी आवेदन किया था। उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT) इकोनॉमिक्स के पद पर नियुक्ति के लिए अप्लाई किया था, लेकिन तकनीकी आधार का हवाला देकर उनकी नियुक्ति रोक दी गई, जिसके बाद उन्होंने कानून का सहारा लिया।वर्ष 2011 की दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (DSSSB)की पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT) परीक्षा में शबाना परवीन ने छठवां स्थान हासिल किया था।पीजीटी वैकेंसी के तहत अनारक्षित उम्मीदवारों के कुल पांच पद थे।
शबाना की ओर से दायर याचिका में बताया गया ये
शबाना की ओर से दायर याचिका में बताया गया है कि पीजीटी रिजल्ट में जिन पांच प्रथम स्थान पाने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की गई थी। उसमें से डॉक्यूमेंटस वेरिफिकेशन के दौरान खामियां मिलने पर एक महिला उम्मीदवार की उम्मीदवारी कैंसिल कर दी गई थी, जिसके बाद शबाना का नाम मेरिट लिस्ट में पांचवें नंबर पर आ गया था, लेकिन इसके बाद भी उनकी नियुक्ति नहीं की गई।शबाना परवीन ने अपनी नियुक्ति रोके जाने के बाद केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण कैट (CAT) में अपील की थी, जिसमें उनकी जीत हुई थी, लेकिन दिल्ली सरकार ने कैट के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी. जिसकी वजह से उनकी नियुक्ति में और देरी हुई, लेकिन अब दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में उनके पक्ष में फैसला दिया है।शबाना परवीन ने कहा कि 12 साल में बहुत बड़े संघर्ष के बाद उन्हें नौकरी मिली है।उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं है।
