मंडी, धर्मवीर ( TSN)-जब भी हम भूंकप का नाम सुनते हैं तो हरकिसी के दिमाग में विनाशकारी तस्वीर अपने आप ही घुमने लगती है। प्रदेश का मंडी जिला भी भूंकप के लिहाज से जोन नंबर 5 में आता है और यहां भी भूंकप से ज्यादा नुक्सान होने का खतरा बना रहता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मंडी जिला प्रशासन ने अब ऐसी तकनीकों पर काम करना शुरू कर दिया है जो भूकंपरोधी हों और यदि तेज गति से भी भूंकप आ जाए तो कम से कम नुक्सान झेलना पड़े। जिला में प्रशासन ने पहले करते हुए सरकारी भवनों को सुरक्षित करना शुरू कर दिया गया है। मंडी जिला प्रशासन द्वारा सरकारी भवनों को यह सुरक्षा रेट्रोफिटिंग के जरिए दी जाएगी।
पहले से बने सरकारी भवनों की होगी रेट्रोफिटिंग
बता दें कि कुछ समय पहले आइआइटी रोपड़ ने मंडी जिला के सरकारी भवनों का सर्वे किया था जिसके बाद प्रशासन ने 26 सरकारी भवनों की रेट्रोफिटिंग करवाने का निर्णय लिया है। आइआइटी रोपड़ और आइआइटी मंडी के सहयोग से जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षित भवनों के निर्माण पर ध्यान दिया जा रहा है। डीसी मंडी अपूर्व देवगन ने बताया कि इन सरकारी भवनों की रेट्रोफिटिंग का प्रस्ताव स्टेट डिजास्टर मेनेजमेंट अथॉरिटी को भेज दिया गया है,जहां से अनुमति का इंतजार है। इन भवनों में डीसी ऑफिस, स्कूल, अस्पताल और पुलिस स्टेशन शामिल हैं। जैसे ही अनुमति प्राप्त होती है तो फिर इन भवनों की रेट्रोफिटिंग का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
अपूर्व देवगन ने बताया कि लोगों को भूकंपरोधी भवनों के निर्माण की तरफ प्रेरित करने की दिशा में भी प्रशासन की तरफ से पूरा प्रयास किया जा रहा है। अभी हालही में जिला में इस विषय पर कार्यशाला का आयोजन भी किया गया था.जिसमें इंजीनियरों को इसकी संपूर्ण जानकारी मुहैया करवाई गई है। उन्होंने लोगों से भी गृह निर्माण या कॉमर्शियल कंस्ट्रक्शन करवाने से पहले उसकी सही ढंग से स्ट्रक्चरल इंजीनिय रे जांच करवाने का सुझाव दिया है ताकि भविष्य में यदि भूकंप के रूप में कोई आपदा आती है तो फिर उस स्थिति में नुकसान कम हो सके।
रेट्रोफिटिंग क्या होती है
रेट्रोफिटिंग में मौजूदा भवन का नवीनीकरण किया जाता है। इसमें नई तकनीक के कुछ ऐसे पुर्जे लगाए जाते हैं जो भूकंप आदि की स्थिति में भवन को सुरक्षित रखने का कार्य करते हैं। इस तकनीक को आप अपने भवनों पर भी इस्तेमाल करके उन्हें भूकंप की दृष्टि से सुरक्षित बना सकते हैं।
