कुल्लू :मनमिंदर अरोड़ा ( TSN)- ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहकारिता अपनी अहम भूमिका निभा रही है और सहकारिता के माध्यम से आज देश में करोड़ों लोगों को रोजगार पर मिल रहा है। ऐसे में हथकरघा के क्षेत्र में भी जिला कुल्लू की सहकारी सभा भुट्टिको देश-विदेश में कुल्लुवी उत्पादों को एक अलग पहचान देने में जुटी हुई है और भुट्टिको सोसायटी के इन कार्यों को देखते हुए मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसका जिक्र किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम में भुट्टीको समिति के द्वारा किए जा रहे कार्यों की चर्चा की और भुट्टीकों के उत्पाद आज देश दुनिया में भी पसंद किया जा रहे हैं।
बता दें कि साल 1944 में 12 लोगों तथा 23 रुपए की पूंजी के साथ भुट्टिको सोसायटी का गठन किया गया था और इस सोसाइटी में आज 1000 से अधिक बुनकरों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी मिल रहा है। साल 1944 में 12 बुनकरों के द्वारा सहकारी समिति का गठन किया गया और साल 1956 में भुट्टीको के संस्थापक स्व वेदराम ठाकुर ने कुल्लू शाल का उद्योग शुरू किया। स्वर्गीय ठाकुर वेदराम ने साल 1960 में भुंतर के पास 32 बीघा जमीन लेकर भुट्टिको सोसायटी को कुल्लू से भुट्टी में शिफ्ट किया और उनकी मृ*त्यु के बाद उनके बड़े बेटे सत्य प्रकाश ठाकुर समिति को आगे बढ़ाने के काम में जुट गए। समिति से जुड़कर आज हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है और वह अपनी आजीविका भी कमा रहे हैं।
भुट्टिको के हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न शहरों में 34 शोरूम है और इस सोसाइटी में 130 नियमित तथा 600 पंजीकृत बुनकर है। सोसायटी ऑनलाइन माध्यम से भी कुल्लू की शाल, टोपी सहित अन्य हथकरघा उत्पादों को बेचा जा रहा है। देसी खड्डी, विदेशी ऊन के साथ कारीगरी कर ब्रांड बनी भुट्टिको पारंपरिक हथकरघा कला के साथ विश्व स्तरीय गुणवत्ता के उत्पाद तैयार करने के लिए साल 1993-94 में वस्त्र मंत्रालय से हथकरघा में विशिष्टता के लिए भी स्वर्ण पुरस्कार मिला है। साल 2005-6 में पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स से उद्योग रत्न अवार्ड और साल 2007-8 में सहकारिता के लिए नेशनल एक्सीलेंस अवार्ड सहित कई अन्य सम्मान सोसायटी के नाम पर है।
भुट्टिको समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री सत्य प्रकाश ठाकुर ने बताया कि सोसायटी के द्वारा हजारों लोगों को प्रत्यक्ष व प्रत्यक्ष रूप से रोजगार दिया जा रहा है। इसके अलावा कुल्लुवी हथकरघा उत्पादों को भी देश दुनिया में अलग पहचान दिलाई गई है। सोसायटी के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के बूते आज अलग कुल्लू की शॉल तथा टोपी की अलग पहचान बनी हुई है और स्थानीय लोगों को भी इसका प्रशिक्षण दिया रहा है।
