/ Jun 22, 2026

मछुआरों को बड़ी राहत: जलाशय मछलियों पर MSP लागू, रॉयल्टी घटकर 1%

शिमला, 12 अप्रैल — हिमाचल प्रदेश सरकार ने मत्स्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने और मछुआरा समुदाय के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण और दूरदर्शी फैसले लिए हैं। यह पहली बार है जब राज्य में जलाशयों से प्राप्त मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू किया गया है, जिससे मछुआरों को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलेगी और उनकी आय में स्थिरता आएगी।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा बजट 2026-27 में की गई घोषणाओं के अनुरूप मत्स्य विभाग इन योजनाओं को लागू करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है—मछुआरों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना, उनकी आजीविका को सुरक्षित बनाना और मत्स्य क्षेत्र को सतत विकास की राह पर आगे बढ़ाना।राज्य सरकार ने जलाशय मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 100 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया है। यदि किसी स्थिति में नीलामी मूल्य इससे कम रहता है, तो सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से प्रति किलोग्राम अधिकतम 20 रुपये तक की सब्सिडी प्रदान करेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि मछुआरों को न्यूनतम आय प्राप्त हो और उन्हें बाजार की अनिश्चितताओं का सामना न करना पड़े। साथ ही, डीबीटी प्रणाली से पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी और सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचेगी।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत, सरकार ने जलाशयों से प्राप्त मछलियों पर लगने वाली रॉयल्टी को घटाकर मात्र 1 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले यह दर 15 प्रतिशत थी, जिसे पहले घटाकर 7.5 प्रतिशत किया गया था। अब इसे और कम करने से 6,000 से अधिक मछुआरों को सीधा लाभ मिलेगा और उनके आर्थिक बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी।
प्रदेश में पांच प्रमुख जलाशय—गोबिंद सागर, पोंग डैम, रंजीत सागर, चमेरा और कोल डैम—मत्स्य उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं। इन जलाशयों में विभिन्न प्रकार की मछलियों का उत्पादन होता है, जिनमें सिल्वर कार्प, सिंधारा, रोहू, कतला, मृगल, कॉमन कार्प और ग्रास कार्प प्रमुख हैं। मत्स्य विभाग द्वारा उन्नत फिंगरलिंग्स (70-100 मिमी) के नियमित स्टॉकिंग जैसे प्रयासों से उत्पादन में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में जहां जलाशयों से मछली उत्पादन 549.35 मीट्रिक टन था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 818.02 मीट्रिक टन हो गया है। यह वृद्धि दर्शाती है कि राज्य में मत्स्य प्रबंधन और तकनीकी हस्तक्षेप सफल साबित हो रहे हैं।सिर्फ जलाशय ही नहीं, बल्कि राज्य के कुल मछली उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2024-25 में कुल उत्पादन 19,019 मीट्रिक टन था, जो 2025-26 में बढ़कर 20,005 मीट्रिक टन हो गया है। यह वृद्धि मत्स्य क्षेत्र में चल रही योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव को रेखांकित करती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसके बढ़ते योगदान को दर्शाती है।सरकार मत्स्य अवसंरचना के विकास, विपणन प्रणाली को मजबूत करने और मछुआरों के लिए नए अवसर सृजित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। ये नीतिगत पहल न केवल मछुआरों की आय में वृद्धि करेंगी, बल्कि राज्य में सतत और संतुलित मत्स्य विकास को भी प्रोत्साहित करेंगी।

Ekta TSN

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