शिमला, 11 March-:पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्गठन को लेकर हिमाचल प्रदेश में सियासत तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने इस मुद्दे पर कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार के फैसलों से उसकी मंशा स्पष्ट हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पंचायती राज चुनावों के मामले में शुरुआत से ही स्पष्ट नीति नहीं अपनाई और लगातार भ्रम की स्थिति पैदा की।
त्रिलोक कपूर ने कहा कि राज्य सरकार पहले विभिन्न कारणों का हवाला देकर पंचायती राज चुनावों को टालने की कोशिश करती रही। अब जब चुनाव प्रक्रिया शुरू होने की स्थिति बनी तो पंचायतों के पुनर्गठन का निर्णय लेकर नई स्थिति पैदा कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसलों से लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और जनता के बीच असमंजस की स्थिति बनती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पंचायतों का पुनर्गठन एक गंभीर और संवेदनशील प्रक्रिया है, जिसे पूरी तैयारी और नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए। लेकिन सरकार ने जल्दबाजी में कदम उठाकर इस पूरे मामले को विवादित बना दिया है। कपूर के अनुसार, यदि इस प्रक्रिया को सही तरीके से और समय रहते पूरा किया जाता तो आज प्रदेश में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण लोकतंत्र की आधारशिला हैं और इनके चुनाव निष्पक्षता तथा पारदर्शिता के साथ होने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक लाभ को ध्यान में रखते हुए ऐसे फैसले लिए हैं, जिनसे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
त्रिलोक कपूर ने सरकार से मांग की कि पंचायती राज चुनावों और पंचायत पुनर्गठन से जुड़े सभी निर्णय पारदर्शी तरीके से लिए जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आगे बढ़े, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत बनी रहे और लोगों का विश्वास कायम रहे।
