Mandi,10 November-:मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को मंडी में आयोजित एक विशाल समारोह में आपदा राहत पैकेज में 30 हजार रुपये की बढ़ोतरी करते हुए इसे 7 लाख 70 हजार से बढ़ाकर 8 लाख रुपये करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और सहायता के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
समारोह के दौरान मंडी, कुल्लू और बिलासपुर जिलों के 4914 आपदा प्रभावित परिवारों को कुल 81.28 करोड़ रुपये की राहत राशि वितरित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले गृह निर्माण के लिए 7 लाख रुपये और घरेलू सामान के लिए 70 हजार रुपये दिए जाते थे। अब घरेलू सामान की राशि में 30 हजार रुपये की वृद्धि करते हुए इसे 1 लाख रुपये कर दिया गया है।उन्होंने बताया कि प्रभावित परिवारों को पहली किस्त के रूप में चार-चार लाख रुपये जारी किए जा रहे हैं, जबकि गृह निर्माण कार्य शुरू होने पर दूसरी किस्त तुरंत जारी की जाएगी ताकि लोगों को पुनर्निर्माण में कोई बाधा न आए।
नीतिका को मिली 21 लाख की एफडी
सीएम सुक्खू ने गोहर उपमंडल के परवाड़ा गांव की 11 माह की आपदा पीड़िता नीतिका के नाम 21 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) देने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह राशि राहत पैकेज से अलग दी गई है और नीतिका के भविष्य के लिए सुरक्षित रखी जाएगी। इस बच्ची ने हालिया आपदा में अपने माता-पिता दोनों को खो दिया था और अब उसकी बुआ उसका पालन-पोषण कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी धर्मशाला दौरे के दौरान इस बच्ची से मिल चुके हैं और उसे दुलार कर चुके हैं।
“मेरे अधिकार में होता तो बदल देता वन अधिनियम”
मुख्यमंत्री ने वन अधिनियम को लेकर अपनी बेबसी भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि वन अधिनियम (Forest Act) के कारण आपदा प्रभावितों को भूमि आवंटन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार के अधीन आता है। सुक्खू ने कहा,अगर यह कानून मेरे अधिकार में होता, तो मैं इसे तुरंत संशोधित कर आपदा प्रभावितों को वन भूमि आवंटित कर देता।उन्होंने बताया कि इस विषय पर केंद्र सरकार से सहयोग मांगा गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस मदद नहीं मिली है।
मंडी मेरा घर-परिवार है, जयराम राजनीति की रोटियां सेंक रहे
समारोह में मुख्यमंत्री सुक्खू ने पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जयराम ठाकुर आपदा प्रभावितों के दुख में शामिल होने के बजाय “राजनीतिक रोटियां सेंकने” में लगे हैं।सुक्खू ने कहा कि बेहतर होता यदि वे और उनके विधायक इस राहत वितरण कार्यक्रम में शामिल होकर प्रभावितों के साथ खड़े होते। उन्होंने कहा,“मंडी मेरा घर और परिवार है। मैं यहां विकास की गंगा बहाने आया हूं,राजनीति की नहीं।”
14 लाख में लुटाई 5 हजार करोड़ की संपत्ति
मुख्यमंत्री ने बद्दी में पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई कथित अनियमितताओं पर भी बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जयराम ठाकुर सरकार ने 5 हजार बीघा बहुमूल्य सरकारी जमीन, जिसकी बाजार कीमत लगभग 5 हजार करोड़ रुपये थी, मात्र 14 लाख रुपये में उद्योगों को आवंटित कर दी।सुक्खू ने कहा कि इस जमीन पर आज तक कोई उद्योग स्थापित नहीं हुआ, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह आवंटन केवल “चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने” के लिए किया गया था।उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अब ऐसे “चोर दरवाजों” को बंद करने जा रही है, ताकि प्रदेश की संपत्ति की रक्षा की जा सके और जनता के हितों की अनदेखी न हो।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता की भलाई ही उनकी सरकार की प्राथमिकता है। आपदा से जूझ रहे लोगों को जल्द से जल्द पुनर्स्थापित करना और उन्हें बेहतर जीवन परिस्थितियाँ देना सरकार का कर्तव्य है।
